India Shayari

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[131+] Zakir Khan Shayari | Zakir Khan Poetry In Hindi

Zakir Khan Zakir Khan is a 34 Years Old Indian YouTuber; stand-up comedian; And poet who Was Born On 20 August 1987 in Indore; Madhya Pradesh; India* He Got Very Famous After Winning  Comedy Central’s India’s Best Stand Up Comedian competition* He Is Also Known For Famous Line Sakht Launda In Young Boys* His Shayari Has a Great Craze In Young Boys And Girls Both*

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Zakir Khan Shayari

Zakir Khan Shayari

हर एक दस्तूर से बेवफाई मैंने शिद्दत से हैं निभाई
रास्ते भी खुद हैं ढूंढे और मंजिल भी खुद बनाई!


मेरी अपनी और उसकी आरज़ू में फर्क ये था
मुझे बस वो 🤐 और उसे सारा जमाना चाहिए था!


ज़मीन पर आ गिरे जब आसमां से ख़्वाब मेरे
ज़मीन ने पूछा क्या बनने की कोशिश कर रहे थे!


यूं तो भूले हैं हमें लोग कई; पहले भी बहुत से
पर तुम जितना कोई उन्मे सें ; कभी याद नहीं आया!


मेरे घर से दफ्तर के रास्ते में
तुम्हारी नाम की एक दुकान पढ़ती हैं
विडंबना देखो; वहां दवाइयां मिला करती है!


लूट रहे थे खजाने मां बाप की छाव मे;
हम कुड़ियों के खातिर; घर छोड़ के आ गए!


दिलों की बात करता है ज़माना;
पर आज भी मोहब्बत चेहरे से ही शुरू होती हैं!


तुम भी कमाल करते हों ;
उम्मीदें इंसान से लगा कर शिकवे भगवान से करते हो!


इश्क़ किया था हक से किया था
सिंगल भी रहेंगे तो हक से !


जिंदगी से कुछ ज्यादा नहीं;
बस इतनी सी फर्माइश है;
अब तस्वीर से नहीं; तफसील से मिलने की ख्वाइश है !


Zakir Khan Poetry

Zakir Khan Poetry

गर यकीन ना हों तो बिछड़ कर देख लो
तुम मिलोगे सबसे मगर हमारी ही तलाश में!


हूँ राम का सा तेज मैं लंकापति सा ज्ञान हूँ
किस की करूं आराधना सब से जो मैं महान हूँ
ब्रह्माण्ड का मैं सार हूँ मैं जल-प्रवाह निहार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ*


भावनाएं मर चुकीं संवेदनाएं खत्म हैं
अब दर्द से क्या डरूं ज़िन्दगी ही ज़ख्म है
मैं बीच रह की मात हूँ बेजान-स्याह रात हूँ
मैं काली का श्रृंगार हूँ मैं शून्य पे सवार हू


मैं शून्य पे सवार हूँ बेअदब सा मैं खुमार हूँ
अब मुश्किलों से क्या डरूं मैं खुद कहर हज़ार हूँ
मैं शून्य पे सवार हूँ मैं शून्य पे सवार हूँ


ये कुछ सवाल हैं जो सिर्फ क़यामत के रोज़
पूँछूगा तुमसे क्योंकि उसके पहले
तुम्हारी और मेरी बात हो सके
इस लायक नहीं हो तुम


तेरी बेवफाई के अंगारो में लिपटी रही हे रूह मेरी;
मैं इस तरह आज न होता जो हो जाती तू मेरी🙂
एक सांस से दहक जाता है शोला दिल का
शायद हवाओ में फैली है खुशबू तेरी


उसे मैं क्या; मेरा खुमार भी मिले तो बेरहमी से तोड़ देती है;
वो ख्वाब में आती है मेरे; फिर आकर मुझे छोड़ देती है


हम दोनों में बस इतना सा फर्क है;
उसके सब “लेकिन” मेरे नाम से शुरू होते है
और मेरे सारे “काश” उस पर आ कर रुकते है


बस का इंतज़ार करते हुए; मेट्रो में खड़े खड़े
रिक्शा में बैठे हुए गहरे शुन्य में क्या देखते रहते हो?
गुम्म सा चेहरा लिए क्या सोचते हो?
क्या खोया और क्या पाया का हिसाब नहीं लगा पाए न इस बार भी?
घर नहीं जा पाए न इस बार भी


जिंदगी से कुछ ज्यादा नहीं;
बस इतनी से फरमाइश है;
अब तस्वीर से नहीं;
तफ्सील से मलने क ख्वाइश है*


अब वो आग नहीं रही; न शोलो जैसा दहकता हूँ;
रंग भी सब के जैसा है; सबसे ही तो महेकता हूँ🤐
एक आरसे से हूँ थामे कश्ती को भवर में;
तूफ़ान से भी ज्यादा साहिल से डरता हूँ🤐


Zakir Khan Shayari In Hindi

Zakir Khan Shayari In Hindi

मेरी जमीन तुमसे गहरी रही है;
वक़्त आने दो; आसमान भी तुमसे ऊंचा रहेगा!


ये सब कुछ जो भूल गयी थी तुम;
या शायद जान कर छोड़ा था तुमने;
अपनी जान से भी ज्यादा;
संभाल रखा है मैंने सब;
जब आओग तो ले जाना🙂


अपने आप के भी पीछे खड़ा हूँ में;
ज़िन्दगी ; कितने धीरे चला हूँ मैं🤐
और मुझे जगाने जो और भी हसीं होकर आते थे;
उन् ख़्वाबों को सच समझकर सोया रहा हूँ मैं🤐l


यूँ तो भूले है हमे लोग कई;
पहले भी बहुत से
पर तुम जितना कोई उनमे से याद नहीं आया


अब कोई हक़ से हाथ पकड़कर महफ़िल में दोबारा नहीं बैठाता;
सितारों के बीच से सूरज बनने के कुछ अपने ही नुकसान हुआ करते है🙂


अब वो आग नहीं रही; न शोलो जैसा दहकता हूँ;
रंग भी सब के जैसा है; सबसे ही तो महेकता हूँ🤐
एक आरसे से हूँ थामे कश्ती को भवर में;
तूफ़ान से भी ज्यादा साहिल से डरता हूँ🤐


यू तो भूले हैं हमे; कई लोग पहले भी बहोत से
पर तुम जितना उनमे से; कभी कोई याद नही आया


मैं भी हैरान हूँ ऐ ‘दाग़’ कि ये बात है क्या
वादा वो करते हैं आता है तबस्सुम मुझ को


मार डाला मुस्कुरा कर नाज़ से
हाँ मिरी जाँ फिर उसी अंदाज़ से


रफ़ीक़ों से रक़ीब अच्छे जो जल कर नाम लेते हैं
गुलों से ख़ार बेहतर हैं जो दामन थाम लेते हैं


कितनी पामाल उमंगों का है मदफ़न मत पूछ
वो तबस्सुम जो हक़ीक़त में फ़ुग़ाँ होता है


तुझे खोने का खौफ जबसे निकला है बाहर;
तुझे पाने की जिद भी टिक न सकी दिल में


Zakir Khan Poetry In Hindi

Zakir Khan Poetry In Hindi

बड़ी कश्मकश में है ये जिंदगी की;
तेरा मिलना मिलना इश्क़ था या फरेब!


मेरा 2-4 ख्वाब हे जो में आसमान से दूर चाहतहु
जिंदगी चाहे गुमनाम रहे मोइत में मसहूर चाहतहु

Mera 2-4 khwab he jo me aasman se dur chahatahu
Jindagi chahe gumnam rehe moit me masuhur chahatahu


अंगारो में लिपटी रही रूह मेरी
मैं इस तरह आग न होता जो हो जाती तू मेरी

Angaro mein lipti rahi ruh meri
Main is Tarah aag Na hota Jo ho jaati Tu meri


हम की एक पीढ़ी हैं
टूटे दिल और टूटे हुए लोग

We are a generation of
Briken heart and broken people


झूठे हैं वो लोग
वो जो बोलते हैं की आदमी रो नहीं सकता  पूछने वाला चाहिए

Jhuthe Hain wo log
Wo Jo bolate Hain ki aadami roo Nahin Sakta  puchne wala chahiye


बहत अच्छे से पता हे की कोनसा दोस्त हे कोनसा दोस्त नही हे
क्यों की एषा हे की हम भी किसीका दोस्त हे

Bahat achhe se pata he ki
Konsa dost he konsa dost nehi he
Kyu ki yesha he ki Hum bhi kisika dost he


बस का इंतज़ार करते हुए मेट्रो में खड़े खड़े
रिक्शा में बैठे हुए गैरिसन में क्या देखते रहते हो
घूम सा चेहरा लेकर क्या सोचते रहते हो
क्या खोया क्या पाया हिसाब नहीं लगा पाये इस बार भी
घर नहीं जा पाये न इस बार भी

Bus Ka intezar karte hue metro mein khade Khade
Rickshaw mein baithe huye
Garrison mein kya dekhte rahte ho
Ghoom sa chehra lekar kya sochte rahte ho
Kya khoya kya paya hisab Nahin laga paye is bar bhi
Ghar Nahin ja paye na is baar bhi


बतादेना सब्को की में मतलबी बड़ा था
हर बड़े मकाम में तनहा ही खड़ा था
मेरा सब बुरा भी कहना; अच्छे भी कहना
में जब दुनिआ से जाऊं तो मेरी दास्ताँ भी सुनना

Batadena sabko ki me matlabi bada tha
Har bade makam me tanha hi khada tha
Mera sab bura bhi kehena; achhe bhi kehena
Me jab dunia se jauu to meri dastan bhi sunana


यह तो भूले है की लोग
हमें पहले ही बहुत से
प्र तुम जितना उसने से
कोई यद् नहीं आया

Yah to bhule hai ki log
hamen pahle hi bahut se
Pra tum jitna usne se
koi yad Nahin Aaya


कुछ इस तरह तेरे मेरे रिश्ते ने आखिरी सांस ले
न मैंने पलट कर देखा
न तुमने आवाज़ दी

Kuch is Tarah tere mere rishte ne aakhiri sans le
Na maine palat kar Dekha
Na Tumne awaaz dee


गिरते हैं से सबेरे मैदान जंग में
वो टाफिले क्यों गिरेंगे जो घटना की वेल चले

अगर अपने कोशिश ही नहीं की तो क्या फेलियर और क्या सक्सेस

Girte Hain se sabere maidane Jung mein
Wo tafile kyu girenge Jo ghatna ki well chale

agar Apne koshish hi Nahin ki to kya failure aur kya success


Attitude Zakir Khan Shayari In Hindi

Attitude Zakir Khan Shayari In Hindi

माना की तुमको इश्क़ का तजुर्बा भी कम नहीं;
हमने भी बाग़ में हैं कई तितलियाँ उड़ाई*


Aur phone toh bilkul nahi karna hai;
Par tumhare kaano par se baal hatane hai
aur ek chhoti si baali pehna deni hai*
bichiya; payal; bindi sab kuch;
apne hatho se pehnana hai*
khusboo mehsoos nahi karni hai tumhari*
Bas palkon ko band hote aur khulte dekhna hai


Jab kabhi yaad aaya kare tumko;
toh meri likhi kuch kavitaiyen padh lena*
bas ek wahi toh jagah hai jaha jhoot nahi
bole haimaine kabhi*


Mere ghar se daftar ke raaste mein;
tumhare naam ki ek dukaan padhti hai*
Vidambana dekho;
wahan Dawaiyan mila karti hain


Phir din khatam; bheed gayab;
Main tanha aur tumse ab bhi naraz;
Phir humara bistar me;
meri ek aur raat; tumhare bin*


use main kya; mera khumar bhi
mile toh berahmi se tod deti hai*
woh khwab me aati hai mere;
phir aa kar mujhe chhod deti hai*


Ye sab kuch jo bhool gayi thi tim;
Ya shayad jaankar chhoda tha tumne*
Apni jaan se bhi jyadaa;
Sambhal rakha hai maine sab;
jab aaogi toh le jaana


Jigar ka nichod kar lahu;

kahaniyon mein rang bhara hai siyaah*
Aur log pooch liya karte hai ki

“yeh sab sach mein hua hai kya


Aur phone toh bilkul nahi karna hai;
Par tumhare kaano par se baal hatane hai
aur ek chhoti si baali pehna deni hai*
bichiya; payal; bindi sab kuch;
apne hatho se pehnana hai*
khusboo mehsoos nahi karni hai tumhari*
Bas palkon ko band hote aur khulte dekhna hai


Hasna logo ke sath;
Unhe dhyan se Sunna;
Khud ko zinda sabit karne ko;
beech beech mekuch keh bhi dena*


Motivational Zakir Khan Poetry In Hindi

Motivational Zakir Khan Poetry In Hindi

मेरी औकात मेरे सपनों से इतनी बार हारी हैं के
अब उसने बीच में बोलना ही बंद कर दिया है!


Jo apni Ijaat nai karta; Jo apane ap se piyar nai karta;

wo ap se kya khak piyar karega*


Adami ko khali chodoge toh kya hi karega🤐

jinko pata hai; Unko pata hai


Use Main Kya; Mera Khumar Bhi Mile Toh Berahmi Se Tod Deti Hai;
Woh Khwab Main Aati Hai Mere; Phir Aakar Mujhe Chhod Deti Hain*


Bewajah Bewafaaon Ko Yaad Kiya Hai;
Galat Logon Pe Bahut Waqt Barbaad Kiya Hai*


Guzara kam me kar liya Chena nahi kisi ka Miti me bgawat rahi;
parwarish me saleqa* Raqeb dhundhte rahe;


shauhrat ka sabab meri* Malom kahan unhe Badon se mohabbat;
choton se bat karne ka tareqa*


Har Ek Dastoor Se Bewafai
Maine Shiddat Se Hai Nibhai;
Raaste Bhi Khud Hai Dhundhe
Aur Manzil Bhi Khud Banayi


Bahut Masum Ladki Hai Ishq Ki Baat Nahi Samajhti;
Na Jane Kis Din Main Khoyi Rehti Meri Raat Nahi Samajhti


Bahot Pighala hu bhai🤐 tabjake sakht huna hunnn


I want to be India most loved comedian


Ego unme hai; Toh hum Halke hai kya


To all girl: Tum Patag nahi ho; Panchhi ho

 koi Dhor tumeh Rok nahi skati


Agar ap Relationship mai apne Partner ko Range hath Pakad lete ho🤐

Toh phir usko Maaf karo🤐* Kya pata vo Sudhare


Jise Piyar hota hai; use hota hai🤐

koi Logic to hota nahi hai🤐BC


Jin Car ke sticker lagaye the kabhi copy par;

Aj wo car Ghar mai khadi hai Garage mai*


Duiya mai bahot se log hai; jo already isak ke dhool mai lete hue hai;
toh dhool zadiye or mohabbat barabri wale se kariye


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