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20210917 200709

[120+] Shaam Shayari | Shayari On Shaam In Hindi | शाम शायरी

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Shaam Shayari

Shaam Shayari

“कहाँ की शाम और कैसी सहर, जब तुम नही होते,

तड़पता है ये दिल आठो पहर, जब तुम नही होते”


शाम को आओगे तुम अच्छा अभी होती है शाम
गेसुओं को खोल दो सूरज छुपाने के लिए


शायर कहकर बदनाम ना करना मुझे दोस्तो,
मै तो रोज शाम को दिनभर का हिसाब लिखता हूं.


शाम ढले ये सोच के बैठे हम तेरी तस्वीर के पास,
सारी ग़ज़लें बैठी होंगी अपने-अपने मीर के पास


भीगी हुई इक शाम की दहलीज़ पे बैठे
हम दिल के सुलगने का सबब सोच रहे हैं


ये इंतजार ग़लत है की शाम हो जाए
जो हो सके तो अभी दौर-ऐ-जाम हो जाए


मुद्दत से एक रात भी अपनी नहीं हुई
हर शाम कोई आया उठा ले गया मुझे.


कहाँ की शाम और कैसी सहर, जब तुम नही होते,
तड़पता है ये दिल आठो पहर, जब तुम नही होते


एक दर्द छुपा हो सीने में तो मुस्कान अधूरी लगती है,
जाने क्यों बिन तेरे मुझको हर शाम अधूरी लगती है..


शामें किसी को माँगती हैं आज भी ‘फ़िराक़’
गो ज़िंदगी में यूँ मुझे कोई कमी नहीं


दर्द की शाम है, आँखों में नमी है,
हर सांस कह रही है, फिर तेरी कमी है.


Shayari On Shaam

Shayari On Shaam

“ढलती शाम सी खूबसूरत हो तुम

मगर शाम की ही तरह बहुत दूर हो तुम”


“सुबह होती नही शाम ढलती नही न ज़ाने क्या खूबी है आप में

आप को याद किए बिना खुशी मिलती नही”


“जिन्दगी को खुश रहकर जिओ  रोज शाम सिर्फ सूरज ही नहीं ढलता

अनमोल जिन्दगी भी ढलती है!!


“तेरी निगाह उठे तो सुबह हो,

  पलके झुके तो शाम हो जाये अगर तू मुस्कुरा भर दे तो कत्ले आम हो जाये.


“हक़ीक़त ना सही तुम, ख़्वाब की तरह मिला करो,

भटके हुए मुसाफिर को, चांदनी रात की तरह मिला करो।”


“यूँ तो हर शाम उम्मीदों में गुज़र जाती थी आज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया ऐ मोहब्बत

तेरे अंजाम पे रोना आया जाने क्यों आज तेरे नाम पे रोना आया।”


“आँखों की चमक पलकों की शान हो तुम, चेहरे की हँसी लबों की मुस्कान हो तुम,

धड़कता है दिल बस तुम्हारी आरज़ू में, फिर कैसे ना कहूँ कि मेरी जान हो तुम।”


“कोई सुहानी धुन जैसी वो, कानों में गुन- गुनाती हैं।

फिर भी दिल में न जाने क्यों, एक ख़ामोशी छा जाती हैं।”


“खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में एक पुराना खत खोला अनजाने में

शाम के साये बालिस्तों से नापे हैं चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में ..”


“ढलती शाम का खुला एहसास है,  मेरे दिल में तेरी जगह कुछ खास है, 

तू नहीं है यहाँ मालूम है मुझे पर,  दिल ये कहता है तू यहीं मेरे पास है।


“शाम सूरज को ढलना सिखाती है, शमा परवाने को जलना सिखाती है,

गिरने वाले को होती तो है तकलीफ, पर ठोकर ही इंसान को चलना सिखाती है”


Heart Touching Shaam Shayari

Heart Touching Shaam Shayari

जिसमें न चमकते हों मोहब्बत के सितारे,
वो शाम अगर है तो मेरी शाम नहीं है.


शाम से आंख में नमी सी है
आज फिर आपकी कमी सी है


शामें किसी को मांगती हैं आज भी फ़िराक
गो ज़िंदग़ी में यूं मुझे कोई कमी नहीं


होती है शाम आंख से आंसू रवां हुए
ये वक़्त कैदियों की रिहायी का वक़्त है


बस एक शाम का हर शाम इंतज़ार रहा
मगर वो शाम किसी शाम भी नहीं आयी


तुम ना लगा पाओगे अंदाज़ा मेरी तबाही का
तुमने देखा ही कहां है मुझे शाम होने के बाद


वही ख़्वाब ख़्वाब हैं रास्ते वही इंतज़ार सी शाम है
ये सफर है मेरे इश्क़ का,न दयार है न क़याम है


कभी-कभी शाम ऐसे ढलती है जैसे घूंघट उतर रहा हो,
तुम्हारे सीने से उठता धुआँ हमारे दिल से गुज़र रहा हो


आप ही होगा उसे शाम का एहसास “क़मर”
चढ़ रहा है अभी सुरज इसे ढल जाने दो


गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं
हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं


Amazing Shayari On Shaam

Amazing Shayari On Shaam

हम अपनी शाम को जब नज़र-ए-जाम करते हैं
अदब से हमको सितारे सलाम करते है.


होते ही शाम जलने लगा याद का अलाव
आँसू सुनाने दुख की कहानी निकल पड़े


घर की वहशत से लरज़ता हूँ मगर जाने क्यूँ
शाम होती है तो घर जाने को जी चाहता है


अब उदास फिरते हो सर्दियों की शामों में
इस तरह तो होता है इस तरह के कामों में


अब तो चुप-चाप शाम आती है
पहले चिड़ियों के शोर होते थे


अब कौन मुंतज़िर है हमारे लिए वहाँ
शाम आ गई है लौट के घर जाएँ हम तो क्या


तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे
मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे


उसने पूछा कि कौनसा तोहफा है मनपसंद
मैंने कहा..वो शाम जो अब तक उधार है..


कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए
तुम्हारे नाम की इक ख़ूब-सूरत शाम हो जाए


हम दुनिया से जब तंग आया करते हैं
अपने साथ इक शाम मनाया करते हैं


हम भी इक शाम बहुत उलझे हुए थे ख़ुद में
एक शाम उस को भी हालात ने मोहलत नहीं दी


गांव की शाम शायरी

गांव की शाम शायरी

“मेरी बाँहों में बहकने की सज़ा भी सुन ले,

अब बहुत देर में आज़ाद करूँगा तुझको।”


जब तुम थे मेरी शाम में था सुबह का आलम
जब से तुम गए हो शाम झलकी है इस दिल में


खुद ही मसरूफ रहते हो सुबह से शाम ढलने तक
और फिर भी याद न करने का गिला हम से करते है


है शाम को मिलने का वादा किसी का
उस सूरज से बोलो जल्दी डूब जाए


उस की आँखों में उतर जाने को जी चाहता है
शाम होती है तो घर जाने को जी चाहता है


शाम से उन के तसव्वुर का नशा था इतना
नींद आई है तो आँखों ने बुरा माना है


तुम्हारी जुल्फ के साये में शाम कर लूँगा
सफ़र इस उम्र का पल में तमाम कर लूँगा


तुम मेरी जिंदगी मे ऐसे शामिल हो
जैसे मंदिर के दरवाजे पर बंधे हुए
मन्नत के धागे !


शाम तक सुबह की नज़रों से उतर जाते हैं
इतने समझौतों पे जीते हैं कि मर जाते हैं!


तुम ना लगा पाओगे अंदाज़ा मेरी तबाही का
तुमने देखा ही कहां है मुझे शाम होने
के बाद


तेरे आने की उम्मीद और भी तड़पाती है
मेरी खिड़की पे जब शाम उतर आती है


खूबसूरत शाम शायरी

खूबसूरत शाम शायरी

“ये शाम और उस पर तेरी यादों की हलावत,

इक जाम में दो शै का नशा ढूंढ रहा हूँ”


होती है शाम आंख से आंसू रवां हुए
ये वक़्त कैदियों की रिहायी का वक़्त है


दर्द की शाम है आँखों में नमी है
हर सांस कह रही हैए फिर तेरी कमी है!


है शाम को मिलने का वादा किसी का
उस सूरज से बोलो जल्दी डूब जाए


नई सुबह पर नज़र पहुंचे मगर आह ये भी
डर है ये सहर भी रफ़्ता-रफ़्ता कहीं शाम तक ना पहुंचे


फिर नहीं लौटा वक़्त
वो शाम और मेरा चैन !!


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