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[145+] Mulakat Shayari In Hindi | पहली बार मिलने की शायरी

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Mulakat Shayari

Mulakat Shayari

 

अगर हमारी आपसे मुलाक़ात होगई होती
आपकी आपके दिलसे अदावत होगई होती


तेरी मुलाक़ात की धनक से दहकती रातें
उजाड़ आँखों के प्यास पाताल की तहों में


हर मुलाक़ात पे महसूस यही होता है
मुझसे कुछ तेरी नज़र पूछ रही हो जैसे


आज तो मिल के भी जैसे न मिले हों तुझसे
चौंक उठते थे कभी तेरी मुलाक़ात से हम


कल रात ज़िंदगी से मुलाक़ात हो गई
लब थरथरा रहे थे मगर बात हो गई


नदीम’ जो भी मुलाक़ात थी अधूरी थी
कि एक चेहरे के पीछे हज़ार चेहरे थे


इश्क़ की ख़ैर हो अल्लाह कि ना-शुक्रों ने
इक अधूरी सी मुलाक़ात को काफ़ी लिक्खा


तेरी मुलाक़ात की धनक से दहकती रातें
उजाड़ आँखों के प्यास पाताल की तहों में


इस मुलाक़ात ने इक रौशनी फैलाई है
लोग बढ़ते हैं तो तहज़ीब बढ़ा करती है


हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई था अगर
फिर ये हंगामा मुलाक़ात से पहले क्या था


गाहे गाहे की मुलाक़ात ही अच्छी है ‘अमीर’
क़द्र खो देता है हर रोज़ का आना जाना


पहली बार मिलने की शायरी

पहली बार मिलने की शायरी

कुदरत के करिश्मों में अगर रात न होती
ख्वाबों में भी फिर उनसे मुलाक़ात न होती


चेहरे पर हंसी छा जाती है,
आँखों में सुरूर आ जाता है,
जब तुम मुझे अपना कहते हो,
मुझे खुद पर गुरुर आ जाता है

Chehre Par Hansi Chh Jati Hai,
Aakhon Men Surur A Jata Hai,
Jab Tum Mujhe Apna Kahte Ho,
Mujhe Khud Par Gurur A Jata Hai


सर्दी की वो रात थी,वो पहली मुलाकात थी,
यूं आये वो सामने मै लगी दिल थामने,
दिल में जगी नई आस भी,
वो पहली मुलाकात थी

Sardi Ki Wo Raat Thi,Wo Pahli Mulakat Thi,
Yun Aaye Vo Samne Mai Lagi Dil Thamne,
Dil Me Jagi Nai Aas Bhi,
Wo Pahli Mulakat Thi


हमारी पहली मुलाकात थी,
एक टक होकर वो मुझे देखे जा रहा था,
में जब भी पलके उठा रही थी,
वो नजरे यह वहा घुमा रहा था…

Hamari Pahli Mulakat Thi,
Ek Tak Hokar Vo Mujhe Dekhe Ja Raha Tha,
Men Jab Bhi Palke Utha Rahi Thi,
Wo Najre Yah Vaha Ghuma Raha Tha


तेरी पहली मुलाकात जिन्दगी में एक बहार लाई,
हर आईने में तेरी तस्वीर मुझे नजर आई,
लोग कहते है प्यार में नींद उड़ जाती है,
हमने तो नींदो में ही प्यार की दुनिया बनाई…

Teri Pahli Mulakat Jindagi Men Ek Bahar Lai,
Har Aine Men Teri Tasvir Mujhe Najar I,
Log Kahte Hai Pyar Men Nind Ud Jaati Hai,
Hamne To Nindo Men Hi Pyar Ki Duniya Banai


आज मुलाकात हुई पहली बार,
पहली बार में ही जुड़ गए दिल के तार,
अवसर पर सिर्फ उनका ही धुन सवार,
क्या बताऊं यारो ऐसे ही होता है प्यार…

Aaj Mulakat Hui Pahli Baar,
Pahli Bar Men Hi Jud Ge Dil Ke Taar,
Avsar Par Sirf Unka Hi Dhun Savar,
Kya Bataun Yaaro Aise Hi Hota Hai Pyar


दिल की धड़कन और मेरी सदा है तू,
मेरी पहली और आखिरी वफ़ा है तू,
चाहा है तुझे चाहत से भी बढ़ कर,
मेरी चाहत और चाहत की इंतिहा है तू…

Dil Ki Dhadakan Aur Meri Sada Hai Tu,
Meri Pahli Aur Aakhiri Vafa Hai Tu,
Chaha Hai Tujhe Chahat Se Bhi Badh Kar,
Meri Chahat Aur Chahat Ki Intiha Hai Tu


मुलाकात‬ तो ‪‎एहतियातन‬ हो गई थी उनसे,
उनसे मिलने का कोई ‪इरादा‬ न था,
‪राह‬ चलते यूँ दे दिया था आने का ‪‎न्यौता‬,
‪महफिल‬ में बुलाने.का कोई वादा न था…

Mulakat‬ To ‪‎ehtiyatan‬ Ho Gai Thi Unse,
Unse Milne Ka Koi ‪irada‬ N Tha,
‪rah‬ Chalte Yu De Diya Tha Aane Kaa ‪‎nyauta‬,
‪mahfil‬ Men Bulane.ka Koi Vada N Tha


कल तक अनजान थे हम फिर बातें हुई,
तेरी मुझसे मेरी तुझसे पहचान हुई,
आज दिल को सुकून है, अब एक नई शुरुआत होगी,
कल तेरी मेरी मुलाकात जो होगी…

Kal Tak Anjaan The Hum Fir Baten Hue,
Teri Mujhse Meri Tujhse Pahchan Hue,
Aaj Dil Ko Sukun Hai,
Ab Ek Nai Shuruaat Hogi,
Kal Teri Meri Mulakat Jo Hogi


कुछ नशा तो आपकी बात का है,
कुछ नशा तो धीमी बरसात का है,
हमे आप यूही शराबी ना कहिए,
यह दिल पर असर तो आपसे मुलाक़ात का है…

Kuch Nasha To Aapki Baat Ka Hai,
Kuch Nasha To Dhimi Barsat Ka Hai,
Hame Aap Yuhi Sharabi Na Kahiye,
Yah Dil Par Asar To Aapse Mulakat Ka Hai


चलते-चलते राह में उनसे पहली मुलाकात हुई,
वो कुछ शर्माई फिर सहम सी गई,
दिल तो हमारा भी किया की,
कह दे उनसे,
अपने दिल की बात,
पर कम्बख्त इस दिल की इतनी हिम्मत ही न हुई…

Chalte-chalte Raah Men Unse Pahli Mulakat Hui,
Vo Kuchh Sharmai Fir Saham Si Gai,
Dil To Hamara Bhi Kiya Ki,
Kah De Unse,
apne Dil Ki Baat,
Par Kambakht Is Dil Ki Itani Himmat Hi N Hue


Mulakat Shayari In Hindi

Mulakat Shayari In Hindi

इस मुलाक़ात ने इक रौशनी फैलाई है
लोग बढ़ते हैं तो तहज़ीब बढ़ा करती है


ये मुलाक़ात मुलाक़ात नहीं होती है
बात होती है मगर बात नहीं होती है


ग़ैरों से तो फ़ुर्सत तुम्हें दिन रात नहीं है
हाँ मेरे लिए वक़्त-ए-मुलाक़ात नहीं है


मिल रही हो बड़े तपाक के साथ
मुझ को यकसर भुला चुकी हो क्या


जाने वाले से मुलाक़ात न होने पाई
दिल की दिल में ही रही बात न होने पाई


मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी
किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी


जब उस की ज़ुल्फ़ में पहला सफ़ेद बाल आया
तब उस को पहली मुलाक़ात का ख़याल आया


बाज़ औक़ात किसी और के मिलने से ‘अदम’
अपनी हस्ती से मुलाक़ात भी हो जाती है


काफ़ी नहीं ख़ुतूत किसी बात के लिए
तशरीफ़ लाइएगा मुलाक़ात के लिए


ज़िंदगी के वो किसी मोड़ पे गाहे गाहे
मिल तो जाते हैं मुलाक़ात कहाँ होती है


न मिलो खुल के तो चोरी की मुलाक़ात रहे
हम बुलाएँगे तुम्हें रात गए रात रहे


Latest पहली बार मिलने की शायरी

Latest पहली बार मिलने की शायरी

कर तो लें हम आपसे मुलाक़ात
क्या समझेंगे पर आप दिल के ज़ज्बात


मुलाकात तो आज भी तुमसे हो जाती है,
मेरे ख्वाब किसी मजबूरी के मोहताज नहीं होते है.

Mulaqat To Aaj Bhi Tumse Ho Jatai Hai,
Mere Khwaab Kisi Majburi Ke Mohtaj Nahi Hote Hai.


हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले,
कितने प्यारे हैं मुझे छोड़ के जाने वाले.

Har Mulaqat Pe Seene Se Lagaane Vale,
Kitane Pyare Hai Mujhe Chod Ke Jane Vale


तू ‪गुजर‬ जाये ‪करीब‬ से,
वो भी ‪‎मुलाकात‬ से कम नहीं.

Tu Gujar Jaye Kareeb Se,
Vo Bhi Mulaqat Se Kam Nahi.


मुलाक़ात हो आपसे , कुछ इस तरह हमारी,
सारी उम्र बस एक, मुलाक़ात में गुज़ार लूँ.

Mulaqat Ho Aapse Kuch Is Tarah Hamari,
Sari Umra Bas Ek Mulaqat Me Gujaar Lu.


नक्शा उठा के कोई नया शहर ढूंढिए,
इस शहर मे तो सब से मुलाकात हो गई.

Naksha Utha Ke Koi Naya Shahar Dhundhiye,
Is Shahar Me To Sab Se Mulaqat Ho Gayi.


जब उस की जुल्फ में पहला सफेद बाल आया,
तब उस को पहली मुलाकात का ख्याल आया.

Jab Us Ki Zulf Me Pahla Safed Baal Aaya,
Tab Us Pahali Mulaqat Ka Khyaal Aaya.


पहली मुलाकात की झिझक भी बेअसर रही ,
सुर्ख रूखसारो को चुमें बिना रह ना पाए हम.

Pahli Mulaqat Ki jhijhak Bhe Beasar Rahi,
Surkh Rukhsaro Ko Chume Bina Rah Na Paye Ham.


ये मुलाक़ात मुलाक़ात नहीं होती है,
बात होती है मगर बात नहीं होती है.

Ye Mulaqat Mulaqat Nahi Hoti Hai,
Baat Hoti Hai Magar Baat Nahi Hoti Hai.


मुलाकात‬ जरुरी हैं, ‪अगर‬ रिश्ते निभाने हो,
‪वरना‬ लगा कर ‪‎भूल‬ जाने से पौधे ‎भी‬ सुख जाते हैं.

Mulaqat Jaroori Hai Agar, Agar Rishte Nibhane Ho,
Varna Laga Kar Bhool Jane Se Paudhe Bhi Sukh Jate Hai.


कौन कहता है मुलाक़ात मेरी आज की है,
तू मेरी रूह के अंदर है कई सदियों से.

Kaun Kahta Hai Mulaqat Meri Aaj Ki Hai,
Tu Meri Rooh Ke Andar Hai Kai Sadiyo Se.


Pehli Mulakat Shayari

Pehli Mulakat Shayari

मुलाक़ात हो आपसे , कुछ इस तरह हमारी
सारी उम्र बस एक, मुलाक़ात में गुज़ार लूँ…


‎मुलाकात‬ जरुरी हैं अगर‬ रिश्ते निभाने हो,
‪वरना‬ लगा कर ‪‎भूल‬ जाने से पौधे ‎भी‬ सुख जाते हैं।


तुझसे करती हूँ ‪मुलाक़ात‬ सिमटने‬ के लिए,
तुमसे ‪मिलती‬ हूँ तो और ‪‎बिखर‬ जाती हूँ।


सोचा कि भुला देंगे हम तुम्हेँ अपने दिल‬ से,
मगर तुम्हारी हर ‪‎मुलाकात‬ हमारा इरादा‬ बदल देती है।


बड़ी अजीब ‪‎मुलाकातें‬ होती थी हमारी,
वो ‪‎मतलब‬ से मिलते थे औऱ हमें मिलने से मतलब था


उसकी ‪‎मासूमियत‬ मे इतना ‪असर‬ था,
कि उसने एक ‪‎मुलाकात‬ मे मेरी ‪‎जिंदगी‬ खरीद ली।


वक़्त को देखा हैं मैंने उड़ते हुए,
अक़्सर जब तुमसे मुलाक़ात होती हैं.


फफख कर रो पङी एक दूजे के हाल पर,
मज़हब और इंसानियत की जब मुलाकात हुई.


तरसेगा जब दिल तुम्हारा मेरी मुलाक़ात को,
ख्वाबो में होंगे तुम्हारे हम उसी रात को.


तेरी तस्वीर ही बहुत है बात करने को
अब तुझसे मिन्नते कौन करें एक मुलाकात करने को


मुलाकात तो आज भी तुमसे हो जाती है तुमसे
मेरे ख्वाब किसी मजबूरी के मोहताज नहीं होते है


मुलाकात जरूरी है अगर रिश्ते निभाने हो वरना
लगाकर भूल जानेसे पौधा भी सुख जाता है


बरसात के दिन तो आ गए
पता नहीं मुलाकात के दिन कब आएंगे


समय ना भी मिले तो भी कर लिया करो बात
हर किसी के नसीब में नहीं होती अगली मुलाकात


ये मशीनी दौर है
अंगूठे से डिलीट कर दी जाती है चंद मुलाकातों की यादें


गाहे गाहे की मुलाक़ात ही अच्छी है…
क़द्र खो देता है हर रोज़ का आना जाना


बहुत कमिया निकालने लगे हैं हम दूसरों में…
आओ एक मुलाक़ात ज़रा आईने से भी कर लें..


Hindi पहली बार मिलने की शायरी

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जाते जाते कहीं भी मुलाक़ात हो जाये आपसे..
तलाश ये नज़र आपको बार बार करती है


तयशुदा मुलाक़ातों में वो बात नहीं बनती
क्या ख़ूब था राहों में अचानक सामने से आना तेरा


सीधी-साधी मुलाक़ात थी,
कौन जानता था उम्रकैद़ थी


सीधी-साधी मुलाक़ात थी,
कौन जानता था उम्रकैद़ थी


पहली ‪मुलाकात‬ थी और हम दोनों ही ‪बेबस‬ थे
वो ‪जुल्फें‬ ना संभाल सके और हम ‪खुद‬ को


लग जा ‪‎गले‬ के फिर ये हसीं रात हो न हो
शायद फिर इस जनम में ‪#‎मुलाक़ात‬ हो न हो


ईस ‪Rana‬ का ‪दिल‬ तो
उस ‪marjani‬ नै जबे ‪काढ‬ लिया था


नक़्शा उठा के कोई नया शहर ढूँडिए
इस शहर में तो सब से ‪#‎मुलाक़ात‬ हो गई


मैँ चाहता था कि ‪खुद‬ से ‪मुलाकात‬ हो…
लेकिन ये ‪आईने‬ भी ‪कद‬ के न निकले मेरे


तेरे‬ ज़िक्र ‪भर‬ से ही ‪हो‬ जाती है ‪तुझसे‬
मेरी ‪मुलाकात‬.


बडी अजीब ‪मुलाकाते‬ होती थी वो हमारी.
वो ‪मतलब‬ से मिलते थे और हमे उनके मिलने से मतलब होता था.


तू ‪गुजर‬ जाये ‪करीब‬ से…
वो भी ‪मुलाकात‬ से कम नहीं.


मिलना जो न हो तुम को तो कह दो न मिलेंगे,
ये क्या कभी परसों है कभी कल है कभी आज।


सीधी – सीधी मुलाकात थी,
कौन जानता था उम्रकैद थी।


हर मुलाक़ात पे सीने से लगाने वाले,
कितने प्यारे हैं मुझे छोड़ के जाने वाले।


वक़्त को देखा हैं मैंने उड़ते हुए,
अक़्सर जब तुमसे मुलाक़ात होती हैं।


कर्ज़दार रहेंगे हम उस हकीम के जिसने
दवा में उनका दीदार लिख दिया


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