India Shayari

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141+ Khafa Shayari | Khafa Shayri In Hindi | खफा शायरी

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Khafa Shayari

Khafa Shayari

सच कहु तुम्हारे बिना
चिरागों में रौशनी न रहेगी


Tum Haste Ho Mujhe Hasaane Ke Liye,
Tum Rote Ho To Mujhe Rulane Ke Liye,
Tum Ek Bar Khafa Ho Kar To Dekho,
Mar Jayenge Tumhe Manaane Ke Liye.

तुम हसते हो मुझे हँसाने के लिए,
तुम रोते हो मुझे रुलाने के लिए,
तुम एक बार खफा होकर तो देखो,
मर जायेंगे तुम्हें मानाने के लिए


Tum Khafa Ho Gaye To Koyi Khushi Na Rahegi,
Tumhare Bina Chiraagon Me Roshni Na Rahegi,
Kya Kahein Kya Gujregi Dil Par,
Zinda To Rahenge Par Zindagi Na Rahegi.

तुम खफा हो गए तो कोई खुशी न रहेगी,
तुम्हारे बिना चिरागों में रौशनी न रहेगी,
क्या कहें क्या गुजरेगी दिल पर,
जिंदा तो रहेंगी पर ज़िन्दगी न रहेगी


Kyun Wo Ruthe Iss Kadar Ke Manaya Na Gaya,
Dur Itne Ho Gaye Ke Paas Bulaya Na Gaya,
Dil To Dil Tha Koi Samandar Ka Saahil Nahi,
Likh Diya Jo Naam Wo Fir Mitaya Na Gaya.

क्यों वो रूठे इस कदर के मनाया न गया,
दूर इतने हो गए के पास बुलाया न गया,
दिल तो दिल था कोई समंदर का साहिल नहीं,
लिख दिया नाम वो फिर मिटाया न गया


Kuchh Iss Tarah Khubsurat Rishte
Tut Jaya Karte Hain,
Dil Bhar Jata Hai To
Log Ruthh Jaya Karte Hain.

कुछ इस तरह खूबसूरत रिश्ते
टूट जाया करते हैं,
दिल भर जाता है तो
लोग रूठ जाया करते हैं


Naaraaj Kyu Ho Humse Kis Baat Pe Ho Ruthe,
Achha Chalo Ye Mana Tum Sachche Hum Jhuthhe,
Kab Tak Chhupaoge Tum Humse Ho Pyar Karte,
Gusse Ka Hai Bahaana Dil Me Ho Hum Pe Marte.

नाराज क्यों हो हमसे किस बात पे हो रूठे,
अच्छा चलो ये माना तुम सच्चे हम झुठे,
कब तक छुपाओगे तुम हमसे हो प्यार करते,
गुस्से का है बहाना दिल में हो हम पे मारते


Jaane Kya Kami Hai Hum Me Ya Khuda,
Jaane Kyu Sab Humse Khafa Rehte Hain,
Humne To Chaha Banana Sab Ko Apna,
Jaane Kyu Sab Humse Juda Rahte Hain.

जाने क्या कमी है हम में या खुदा,
जाने क्यों सब हमसे खफा रहते हैं,
हमने तो चाहा बनाना सबको अपना,
जाने क्यों सब हमसे जुदा रहते हैं।


Zamana Agar Hum Se Ruthh Bhi Jaye To,
Iss Baat Ka Hamein Gam Koyi Na Hoga,
Magar Aap Jo Humse Khafa Ho Gaye To,
Hum Par Iss Se Bada Sitam Na Koyi Hoga.

जमाना अगर हम से रूठ भी जाये तो,
इस बात का हमें गम कोई न होगा,
मगर आप जो हमसे खफा हो गए तो,
हम पर इस से बड़ा सितम न कोई होगा।


Dil Se Teri Yaad Ko Juda To Nahi Kiya,
Rakha Jo Tujhe Yaad Kuchh Bura To Nahi Kiya,
Hum Se Tu Naraaj Hai Kis Liye Bata Jaraa,
Humne Kabhi Tujhe Khafa To Nahi Kiya.

दिल से तेरी याद को जुदा तो नहीं किया,
रखा जो तुझे याद कुछ बुरा तो नहीं किया,
हमसे तू नाराज है किस लिए बता जरा,
हमने कभी तुझे खफा तो नहीं किया।


Us Se Khafa Ho Kar Bhi Dekhenge Ek Din,
Ke Uske Manaane Ka Andaaz Kaisa Hai.

उस से खफा होकर भी देखेंगे एक दिन,
के उसके मानाने का अंदाज़ कैसा है


Thodi Thodi Hi Sahi Magar Baatein To Kiya Karo,
Chupchap Rahti Ho To Khafa Khafa Si Lagti Ho.

थोड़ी थोड़ी ही सही मगर बातें तो किया करो,
चुपचाप रहती हो तो खफा खफा सी लगती हो।


Khafa Shayri

Khafa Shayari

ख़ुदाई को भी हम न ख़ुश रख सके
ख़ुदा भी ख़फ़ा का ख़फ़ा रह गया


करते है मोहब्बत और जताना भूल जाते है
पहले खफा होते हैं फिर मनना भूल जाते है,
भूलना तो फितरत सी है ज़माने की
लगाकर आग मोहब्बत की बुझाना भूल जाते है


खफा होने से पहले खता बता देना,
रुलाने से पहले हँसना सिखा देना,
अगर जाना हो कभी हम से दूर आप को,
तो पहले बिना सांस लिए जीना सिखा देना


वो आए थे मेरा
दुख-दर्द बाँटने के लिए,
मुझे खुश देखा तो
खफा होकर चल दिये


काश कोई मिले इस तरह के
फिर जुदा ना हो,
वो समझे मेरे मिज़ाज़ को
और कभी खफा ना हो


जो भी मिला वो हम से खफा मिला
देखो हमे मोहब्बत का क्या सिला मिला,
उम्र भर रही फ़क़त वफ़ा की तलाश हमे
पर हर शख्स मुझ को ही क्यों बेवफा मिला


कभी हमसे खफा न हो जाना,
जानेमन बेवफा न हो जाना जो,
याद आए मगर मिल न सके तू भी,
कोई खुदा न हो जाना


चुप रहते है के कोई खफा न हो जाये,
हमसे कोई रूसवा न हो जाये,
बडी मुश्किल से कोई अपना बना है,
डरते है की मिलने से पहले ही कोई जुदा न हो जाये


कुछ इस तरह खूबसूरत रिश्ते
टूट जाया करते हैं,
दिल भर जाता है तो
लोग खफा हो जाया करते हैं


कभी खफा मत होना हमसे
पता नहीं जिंदगी कब तक साथ निभाएगी,
अगर आप भी हमसे रूठ जाओगे तो
मौत जिंदगी से पहले आ जाएगी


लोग कहते हैं कि तू
अब भी ख़फ़ा है मुझसे,
तेरी आँखों ने तो
कुछ और कहा है मुझसे


आग दिल मे लगी जब वो खफा हुए
महसूस हुआ तब जब वो जुदा हुए
कर के वफ़ा कुछ दे ना सके वो
पर बहुत कुछ दे गये जब वो बेवफा हुए


खफा होने से पहले खता बता देना
रुलाने से पहले हँसना सिखा देना
अगर जाना हो कभी हम से दूर आप को
तो पहले बिना सांस लिए जीना सिखा देना


जमाना अगर हम से रूठ भी जाये तो
इस बात का हमें गम कोई न होगा
मगर आप जो हमसे खफा हो गए तो
हम पर इस से बड़ा सितम न कोई होगा


हमें आज कल की फिकर फिर से होने लगी
था लकीरों में जिसकी वो हमें आज खोने लगी
थी खफा वो हमसे हफ्तों से जाने किस बात पर
मैं मनाने गया और वो रोने लगी


जो भी मिला वो हम से खफा मिला
देखो हमे मोहब्बत का क्या सिला मिला
उम्र भर रही फ़क़त वफ़ा की तलाश हमे
पर हर शख्स मुझ को ही क्यों बेवफा मिला


अब उनकी तारीफ़ें नहीं आती
शायद वो हमें पढ़ने नहीं आती
क्यों ख़फ़ा-ख़फ़ा सी है क़िस्मत
रूह, रूह को मिलने नहीं आती


हमने आपको रब माना
यूं समझो जो था सब माना
मगर वो बेवजह खफा होते रहे
यूं हमने वफा का चुकाया जुर्माना


कभी हमसे खफा न हो जाना
जानेमन बेवफा न हो जाना जो
याद आए मगर मिल न सके तू भी
कोई खुदा न हो जाना


इश्क़ है मगर जताना नहीं आता
हमें हाल-ए-दिल बताना नहीं आता
खफा होकर बैठे है इस बात पर मुझसे
कि हमें सलीके से मनाना भी नहीं आता


तुम खफा हो गए तो कोई खुशी न रहेगी
तुम्हारे बिना चिरागों में रौशनी न रहेगी
क्या कहें क्या गुजरेगी दिल पर
जिंदा तो रहेंगी पर ज़िन्दगी न रहेगी


Khafa Shayari In Hindi

Khafa Shayari In Hindi

हर एक शख्स खफा मुझसे अंजुमन में था,
क्योंकि मेरे लब पे वही था जो मेरे मन में था


बिछड़ के तुमसे ज़िन्दगी सज़ा लगती है,
ये सांस भी जैसे मुझसे ख़फ़ा लगती है,
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किससे करूँ
मुझको तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफा लगती है


आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हो गए,
महसूस हुआ तब जब वो जुदा हो गए.
करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो हमें,
पर बहुत कुछ दे गए जब बेवफ़ा हो गए.


चाँद का क्या कसूर अगर रात बेवफा निकली,
कुछ पल ठहरी और फिर चल निकली,
उन से क्या कहे वो तो सच्चे थे,
शायद हमारी तकदीर ही हमसे खफा निकली.


सब कुछ है मेरे पास पर दिल की दवा नहीं
दूर वो मुझसे हैं पर मैं खफा नहीं,
मालूम है अब भी वो प्यार करते हैं मुझसे
वो थोड़ा सा जिद्दी है, मगर बेवफा नहीं.


तुम खफा हो गए तो कोई खुशी न रहेगी,
तुम्हारे बिना चिरागों में रौशनी न रहेगी,
क्या कहें क्या गुजरेगी दिल पर,
जिंदा तो रहेंगी पर ज़िन्दगी न रहेगी.


इस अजनबी दुनिया में अकेला ख्वाब हूँ मैं
सवालो से खफा छोटा सा जवाब हूँ मै,
आँख से देखोगे तो खुश पाओगे
दिल से पूछोगे तो दर्द का सैलाब हूँ मै.


हम ज़िन्दगी में आपसे खफा हो नहीं सकते,
मोहब्बत के रिश्ते बेवफा हो नहीं सकते,
आप भले ही याद किये बिना सो जाओ,
हम याद किये बिना सो नहीं सकते.


ढूंढ़ रही है वो मुझसे
ख़फ़ा होने का तरीका,
सोचता हूँ थप्पड़ मारकर
उसकी मुश्क़िल आसान कर दूँ


कमाल का शख्स था
जिसने ज़िंदगी तबाह कर दी,
राज़ की बात है दिल
उससे खफा अब भी नहीं


आग दिल मे लगी जब वो खफा हुए
महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए,
कर के वफ़ा कुछ दे ना सके वो ,
पर बहुत कुछ दे गये जब वो बेवफा हुए


दिल से तेरी याद को जुदा तो नहीं किया
रखा जो तुझे याद कुछ बुरा तो नहीं किया
हमसे तू नाराज है किस लिए बता जरा
हमने कभी तुझे खफा तो नहीं किया


छोड़ देते है उनको तंग करना
जब वो खफा खफा से हो
लेकिन जिसे अपना समझ लेते है
तो दुर हम जाने नही देते


हर बार इल्जाम हम पर ही
लगाना ठीक नहीं
वफ़ा खुद से नहीं होती
और खफा हम पर होते हो


कभी बोलना वो ख़फ़ा-ख़फ़ा
कभी बैठना वो जुदा-जुदा
वो ज़माना नाज़ ओ नियाज़ का
तुम्हें याद हो कि न याद हो


चलो एक रस्म हम भी निभा
लें आज से
जो खफा है हमसे उनको
भी दुआ दे दें


कमाल का शख्स था जिसने
ज़िंदगी तबाह कर दी
राज़ की बात है दिल उससे
खफा अब भी नहीं


या वो थे ख़फ़ा हम से
या हम हैं ख़फ़ा उन से
कल उन का ज़माना था आज
अपना ज़माना है


तुम खफा हो गए तो कोई खुशी न रहेगी
तुम्हारे बिना चिरागों में रौशनी न रहेगी
क्या कहें क्या गुजरेगी दिल पर
जिंदा तो रहेंगे पर ज़िन्दगी न रहेगी


करते है मोहब्बत और जताना भूल जाते है
पहले खफा होते हैं फिर मनना भूल जाते है
भूलना तो फितरत सी है ज़माने की
लगाकर आग मोहब्बत की बुझाना भूल जाते है


तुम हसते हो मुझे हँसाने के लिए
तुम रोते हो मुझे रुलाने के लिए
तुम एक बार खफा होकर तो देखो
मर जायेंगे तुम्हें मानाने के लिए


जैसे रूह जुदा हो गयी
ज़िन्दगी खफा हो गयी
जो साथ थे कभी
वो जान अब सज़ा हो गयी


बिछड़ के तुमसे ज़िन्दगी सज़ा लगती है
ये सांस भी जैसे मुझसे ख़फ़ा लगती है
अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किससे करूँ
मुझको तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफा लगती है


आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हो गए
महसूस हुआ तब जब वो जुदा हो गए
करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो हमें
पर बहुत कुछ दे गए जब बेवफ़ा हो गए


चाँद का क्या कसूर अगर रात बेवफा निकली
कुछ पल ठहरी और फिर चल निकली
उन से क्या कहे वो तो सच्चे थे
शायद हमारी तकदीर ही हमसे खफा निकली


जाने क्या कमी है हम में या खुदा
जाने क्यों सब हमसे खफा रहते हैं
हमने तो चाहा बनाना सबको अपना
जाने क्यों सब हमसे जुदा रहते हैं


Khafa Shayri In Hindi

Khafa Shayari In Hindi

रुठने का हक हैं तुझे, पर वजह बताया कर,
खफा होना गलत नहीं, तू खता बताया कर


थोड़ी ही सही मगर बाते तो किया करो,
चुपचाप रहते हो तो खफा से लगती हो।
Thodi Hi Sahi Magar Baatein To Kiya Karo,
Chupchaap Rehte Ho To Khafa Se Lagti Ho.


अजीब शख्स है भेद ही ना खुलते उसके,
जब भी देखूं तो दुनिया से खफा ही देखूं।
Ajeeb Shakhs Hai Bhed Hi Na Khulte Uss Ke,
Jab Bhi Dekhun To Duniya Se Khafa Hi Dekhun.


इतना तो बता जाओ खफा होने से पहले,
वो क्या करें जो तुम से खफा हो नहीं सकते।
Itna To Bataa Jaao Khafa Hone Se Pehle,
Wo Kya Karein Jo Tum Se Khafa Ho Nahi Sakte.


वो आए थे मेरा दुख-दर्द बाँटने के लिए,
मुझे खुश देखा तो खफा होकर चल दिये।
Wo Aaye The Mera Dukh-Dard Baantne Ke Liye,
Mujhe Khush Dekha To Khafa Ho Kar Chal Diye


रूठ जाना तो मोहब्बत की अलामत है मगर,
क्या खबर थी वो इतना खफा हो जाएगा।
Roothh Jana To Mohabbat Ki Alamat Hai Magar,
Kya Khabar Thi Wo Itna Khafa Ho Jayega.


खफा खफा से रहते हो
कोई बात है क्या
बताते नहीं कुछ भी मुझ से
कोई राज है क्या

Khafa khafa se rahatee ho
Koi baat hai kya
Batate nahi kuchh bhi mujhae
Aj Kal chhupate ho
Koi raaj hai kya


हमसे प्यार बहुत करती हो
ये हम कैसे मान ले
क्योकि हमें याद ही
कभी कभी करती हो

Hamase pyaar bahut karate ho
Ye ham kaise maan le
Kyoko hame yaad hi
Kabhi kabhi karate ho


यू रोज रोज खफा खफा रहोगी
तो प्यार कब करोगी
जो हम रूठ जायेंगे
तो हाथ मलोगी
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Yu roj roj khafa khafa rahogi
To pyaar kab karogi
Jo hum ruth jayenge
To hath malogi


जब भी खफा होती हो मुझसे
मान जाया करो जल्दी से
क्योकि मे तुमसे प्यार
करता हू दिल से

Jab bhi khafa hoti ho mujhase
Maan jaya karo jaldi se
Kyoki mai tumase pyaar
Karata hu Dil se


आज कल चुप सा रहते हो
कुछ कहते नहीं खफा हो क्या
चलो ठीक है अब ये बताओ मानोगी कैसे
मेरे लिए कोई सजा है पढ़ने के लिए क्लिक करें


Aj kal chup sa rahate ho
Kuch kahate nahi khafa ho kya
Chalo thik hai ab ye batao manogi kaise
Mere liye koi saja hai kya


तू जाने क्यों रूठी है
मेरा क्या कसूर
तू मांगे तो जान भी देदु
खफा होने में क्या रखा है

Tu jaane kyo ruthi hai
Mera kya kasoor hai
Tu maange to jaan bhi dedu
Khafa hone me kya rakha hai


तुझे मानाने के लिए मै
तारे भी तोड़ लाऊंगा
तेरा प्यार पाने के लिए
मे खुदा से भी लड़ जाऊंगा

Tujhe manane ke liye mai
Taare bhi tod launga
Tera pyaar pane ke liye
Mai khuda se bhi lad jaunga


रूठे हो कब से अब मान भी जाओ ना
ना जलाओ मेरे दिल को
आओ गले लग जाओ
मेरी प्यास बुझाओ ना

Ruthe ho kabase ab maan bhi jao na
NA jalao mere dil ko
Aao gale lag jao meri pyaas bujhao na


वो खफा है मुझसे
कोई जाये माना के लाये
और मुझसे लाखो दुआए पाए

Wo khafa hai mujhase
Koi jaye mana ke laye
Aur mujhase lakho duaye paaye


Khafa Shayari In Hindi

Khafa Shayari In Hindi

 

यूँ लगे दोस्त तेरा मुझसे खफ़ा हो जाना
जिस तरह फूल से खुशबू का जुदा हो जाना


ना जाने आज भी मुझे तेरा इंतज़ार क्यों है,
बिछुड़ने के बाद भी मुझे तुझसे प्यार क्यों है।

Na jane aaj bhi mujhe tera intzaar kyu hai,
Bichhudne ke baad bhi mujhe tujhse pyar kyu hai


खफा नहीं हूँ तुझसे ए-ज़िन्दगी,
बस ज़रा दिल लगा बैठा हूँ इन उदासियों से।

Khafa nahi hu tujhse ae-zindagi,
Bus zara dil laga baitha hu in udasiyo se


तुम्हारे बाद बड़ा फर्क आ गया है हममे,
तुम्हारे बाद किसी पर खफा नहीं हुए हम।

Tumhare baad bada fark aa gaya hai mujhme,
Tumhare baad kisi par khafa nahi hue hum


उससे खफा होकर देखेंगे एक दिन,
कि उसके मनाने का अंदाज़ कैसा है।

Usse khafa hokar dekhenge ek din,
Ki uske manane ka andaz kaisa hai.


मनाऊ भी तो मनाऊ उसे कैसे,
जो रूठा नहीं बदल गया हैं।

Manau bhi to manau use kaise
Jo rutha nahi badal gaya hai.


लोग कहते है कि तू अब भी खफा है मुझसे,
तेरी आँखों ने तो कुछ और ही कहा है मुझसे।

Log khte hai ki tu ab bhi khafa hai mujhse,
Teri aankho ne to kuch aur hi kaha hai mujhse.


आओ कुछ देर को खफा होकर,
अपने रिशते की हद समझ ले हम।

Aao kuch der ko khafa hokar,
Apne rishte ki hadd smjh le hum


खफा हो मुझसे मान जाओ ना,
लेलो मेरी जान मुझे यू सताओ ना।

Khafa ho mujhse maan jao na,
Lelo meri jaan mujhe yu satao na.


Khafa Shayri In Hindi

Khafa Shayri In Hindi

किस-किस को बताएँगे जुदाई का सबब हम,
तू मुझ से खफा है, तो जमाने के लिए आ


या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से
कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है


लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझसे,
तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझसे


ख़ुदाई को भी हम न ख़ुश रख सके
ख़ुदा भी ख़फ़ा का ख़फ़ा रह गया


छेड़ मत हर दम न आईना दिखा
अपनी सूरत से ख़फ़ा बैठे हैं हम


ख़फ़ा तुम से हो कर ख़फ़ा तुम को कर के
मज़ाक़-ए-हुनर कुछ फ़ुज़ूँ चाहता हूँ


मैं ने रो कर गुज़ार दी ऐ अब्र
जैसे तू ने बरस के काटी है


मुझको हसरत कि हक़ीक़त में न देखा उसको
उसको नाराज़गी क्यूँ ख़्वाब में देखा था मुझे


कभी बोलना वो ख़फ़ा ख़फ़ा कभी बैठना वो जुदा जुदा
वो ज़माना नाज़ ओ नियाज़ का तुम्हें याद हो कि न याद हो


हुस्न यूँ इश्क़ से नाराज़ है अब
फूल ख़ुश्बू से ख़फ़ा हो जैसे


क्या कहूँ क्या है मेरे दिल की ख़ुशी
तुम चले जाओगे ख़फ़ा हो कर

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