India Shayari

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[151+] Kasam Shayari | Kasam Todne Wali Shayari | कसम शायरी

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Kasam Shayari

Kasam Shayari

 

तुम बात करने का मौका तो दो ,कसम से ,
रूला देंगे तुम्हें तुम्हारे ही सितम गिनाते गिनाते


कसम खाया था ना दुबारा मिलेंगे
फिर उसी राह पे निकल पड़े हैं,
तेरी यादों को मिटा दिया,
फिर भी तेरी चौखट पर खड़े हैं


सौ बार समझाया इस दिल को हमने,
100 बार दिल टूट गया,
सौ बार उसे भूलने की कसम खायी हमने,
हर बार कसम दिल भूल गया


तू एकबार मेरी निगाहो मे देख कर कह दे,
कि हम तेरे काबिल नही,
कसम तेरी चलती साँसो की,
हम तुझे देखना तक छोड़ देंगे


तुमको यकीन नही मुझपर,
तो फिर कसमों पर कैसे यकीन आएगा,
तुझे यकीन दिलाने की खातिर,
दिल अपना चीर कर कौन दिखायेगा


मौसम को मौसम की बहारों ने लूटा,
हमे कश्ती ने नहीं किनारों ने लूटा,
आप तो डर गये मेरी एक ही कसम से,
आपकी कसम देकर हमें तो हज़ारों ने लूटा


जब वो मुहँ मे क्लिप दबा कर,
अपने खुले बालो को समेटती है.
खुदा कसम ज़िन्दगी रुक सी जाती है.


पीनेकी आदत थी मुझे,
उसने अपनी कसम देकर छुड़ा दी,
शाम को यारो की महफ़िल में बैठा तो,
यारो ने उसकी कसम देकर पीला दी


कौन है जिसने मय नही चक्खी
कौन झूठी क़सम उठाता है,
मयकदे से जो बच निकलता है
तेरी आँखों में डूब जाता है


जिसे अंजाम तुम समझते हो,
इब्तिदा है किसी कहानी की !
कसम इस आग और पानी की,
मौत अच्छी है बस जवानी की


सौ बार समझाया इस दिल को हमने, सौ बार दिल टूट गया,
सौ बार उसे भूलने की कसम खायी हमने,
सौ बार हर कसम दिल भूल गया.


Kasam Todne Wali Shayari

Kasam Todne Wali Shayari

तू ने कसम मय-कशी की खाई है ‘ग़ालिब’
तेरी कसम का कुछ एतिबार नही है.


Tu Ne Kasam Mai-Kashi Ki Khaayi Hai ‘Ghalib’
Teri Kasam Ka Kuch Aitbaar Nahi Hai

तू ने क़सम मय-कशी की खाई है ‘ग़ालिब’
तेरी क़सम का कुछ ए’तिबार नहीं है


Zehar Milta Hi Nahi Mujh Ko Sitamgar Warna
Kya Kasam Hai Tere Milne Ki k Kha Bhi Na Sakun

ज़हर मिलता ही नहीं मुझ को सितमगर वर्ना
क्या क़सम है तिरे मिलने की कि खा भी न सकूँ


Khuda Ko Kaam To Saunpe Hain Mai Ne Sab Lekin
Rahe Hai Khauf Mujhe Vaan Ki Be-Niyazi Ka

ख़ुदा को काम तो सौंपे हैं मैं ने सब लेकिन
रहे है ख़ौफ़ मुझे वाँ की बे-नियाज़ी का


तेरी खाई हुई मेरे सर की कसमे,
मुझे आज भी बीमार रखती हैं.

Teri Khaai Huyi Mere Sir Ki Kasame,
Mujhe Aaj Bhi Beemar Rakhti Hai.


अगर पता होता कि इतना तड़पाती है मोहब्बत,
तो कसम से दिल लगाने से पहले हाथ जोड़ लेते.

Agar Pata Hota Ki Itna Tadpati Hai Mohabbat,
To Kasam Se Dil Lagaane Se Pahale Hath Jod Lete


फिर उसी राह पे निकल पड़े हैं,
कल जहाँ ना जाने की कसम खा बैठे थे.

Fir Usi Raah Pe Nikal Pade Hai,
Kal Jahan Na Jane Ki Kasam Kha Baithe The


मोहब्बत की कसम, वो ऐसी नही थी,
वो मेरी थी मगर कहती नही थी.

Mohabbat Ki Kasa, Vo Aise Nahi Thi,
Vo Meri Thi Magar Kahti Nahi Thi


आइने में लगी, बिंदियों की कसम,
हूँ मैं ज़िंदा अभी तक, सिर्फ तेरे ही लिए सनम.

Aaine Me Lagi Bindiya Ki Kasam,
Hu Mai Zinda Abhi Tak, Sirf Tere Hi Liye Sanam


काश वो भी आकर हम से कह दे, मैं भी तन्हाँ हूँ,
तेरे बिन, तेरी तरह, तेरी कसम तेरे लिए.

Kash Vo Bhi Aakar Ham Se Kah De, Mai Bhi Tanha Hu,
Tere Bin, Teri Tarah, Teri Kasam Tere Liye


अगर कसमें सची होती तो,
ऐ- दोस्त सबसे पहले खुदा मरता.

Agar Kasme Sachi Hoti To,
Ae-Dost Sabse Pahle Khuda Marta


तुम बात करने का मौका तो दो सम से,
रूला देंगे तुम्हें तुम्हारे ही सितम गिनाते गिनाते.

Tum Baat Karne Ka Mauka To Do Sam Se,
Rula Denge Tumhe Tumhare Hi Sitam Ginaate Ginaate


फिर उसी राह पे निकल पड़े हैं,
कल जहाँ ना जाने की कसम खा बैठे थे.

Fir Usi Raah Pe Nikal Pade Hai,
Kal Jaha Na Jane Ki Kasam Kha Baithe Hai


हमको कसम तुम्हारी कुछ यकीन कर,
हम भी न उफ़ करेंगे चाहे कोई सता ले.

Hamko Kasam Tumhari Kuch Yakin Kar,
Ham Bhi Na Uff Karenge Chahe Koi Sata Le


तू कहीं भी हो तेरे फूल से आरिज़ की क़सम,
तेरी पलकें मेरी आंखों पे झुकी रहती हैं.

Tu Kahi Bhi Ho Tere Phool Se Aarij Ki Kasam,
Teri Palke Meri Aankho Pe Jhuki Rahti Hai


दिल तुड़वाकर देखो कसम से लिखना क्या,
महफ़िल को रुलाना भी सीख जाओगे.

Dil Tudvakar Dekho Kasam Se Likhna Kya,
Mahfil Ko Rulana Bhi Sikh Jaoge


जिसे अंजाम तुम समझते हो,
इब्तिदा है किसी कहानी की.

Jise Anjaam Tum Samajhte Ho,
Ibtida Hai Kisi Kahani Ki


किसी ने धूल क्या झोकी आखों में,
कसम से पहले से बेहतर दिखने लगा.

Kisi Ne Dhool Kya Jhoki Aankho Me,
Kasam Se Pahale Se Behtar Dikhane Laga


तुझसे ना मिलने की कसम खाकर,
हर राह में तुझे ढूँढा बहुत है.

Tujahne Na Milane Ki Kasam Khaakar,
Har Raah Me Tujhe Dhundha Bahut Hai


Kasam Shayari In Hindi

Kasam Shayari In Hindi

अगर पता होता कि इतना तड़पाती है महोब्बत
तो कसम से दिल लगाने से पहले हाथ जोड़ लेते..


बेपनाह मोहब्बत करनेके बादभी
सपने कही वादीयोमे डुब गये
जहा उसने साथ चलनेकी कसम खाईथी
शायद बेपरवाह हम हि थे ,
जिस्मकी जगह हमने रूह को जान लगाई थि


कसम खा ली बहुत सी जिंदगी में,
लेकिन आज ये कसम खाता हूँ कि
कभी कसम नहीं खाऊंगा बल्कि
अपनी अब तक खाईं हुई कसम पे
खरा उतरने की कोशिश करूँगा।


ज़र्रा ज़र्रा कायनात का वाकिफ़ था
उसके ख्यालातो से..
बस इक हमे खबर होती तो
कसम से क्या बात थी


ज़र्रा ज़र्रा कायनात का वाकिफ़ था
उसके ख्यालातो से..
बस इक हमे खबर होती तो
कसम से क्या बात थी..


कसम” शब्द कुछ ऐसे इस्तेमाल होता है,
जैसे हर झूठ बस इसी का इंतजार करता है।
और “कसम” खाते ही झूठ भी सच का तलबगार होता है।


तोड़ दो ना वो कसम जो खाई हैं,
कभी कभी याद करने में क्या बुराई हैं,
याद आप को किये बिना रहा भी नहीं जाता,
दिल में जगह आपने ऐसी जो बनाई हैं


एक दिल मेरे दिल को जख्म दे गया,
ज़िन्दगी भर जीने की कसम दे गया,
लाखों फूलों में से एक फूल चुना हमने,
जो काँटों से गहरी चुभन दे गया


मंजिल भी उसी की थी रास्ता भी उसका था,
एक हम अकेले थे काफ़िला भी उसका था,
साथ-साथ चलने की कसम भी उसी की थी,
और रास्ता बदलने का फ़ैसला भी उसका था


हर कदम हर पल साथ हैं,
दूर होकर भी हम आपके पास हैं,
आपका हो न हो पर हमें आपकी कसम,
आपकी कमी का हर पल अहसास हैं


गम नही ये कि कसम अपनी भुलाई तुमने,
गम तो ये है कि रकीबों से निभाई तुमने,
कोई रंजिश थी अगर तुमको तो मुझसे कहते,
बात आपस की थी, क्यूँ सब को बताई तुमने


बदलना आता नहीं हमें मौसम की तरह,
हर इक रूप में तेरा इंतजार करते हैं,
ना तुम समझ सकोगे जिसे कयामत तक,
कसम तुम्हारी तुम्हें हम इतना प्यार करते हैं


जब भी किसी को करीब पाया है,
कसम ख़ुदा की उसी से धोखा खाया है,
क्यों दोष देते है हम काँटों को,
जख्म तो हमने फूलों से ही पाया हैं


परछाई बनकर जिन्दगी भर,
तेरे साथ चलने का इरादा हैं,
तोड़कर दुनिया की सारी रस्में-कसमें,
तेरे साथ जीने का वादा हैं


Kasam Todne Wali Shayari In Hindi

Kasam Todne Wali Shayari In Hindi

साथ गुज़ारे हुए उन लम्हों की क़सम ।
वल्लाह हूर से भी बेहतर है मेरी सनम


कसमों का रिवाज़ नही यहाँ,
पल भर में ज़िन्दगी बदल जाती है,
अगर मिल जाए कोई वायदों को पूरा करने वाला,
तो ये ज़िन्दगी भी आखिर कम पड़ ही जाती है


तुने जो कसमें खायीं थी इश्क में जीने मरने की
झूठी निकलीं पर खुदा करे इसका असर ना हो ।
बेवफा दिल को मंजूर नहीं तेरी आँखों में आंसू
मुझ पर तेरे सितमों में भले कोई कसर ना हो


लो जी! शुरु हुआ फ़रेबी माह, इश्क़ में खायी जाएंगी
झूठी सच्ची कसमें, कोई चाँद तारे तोड़ने की बात करेगा,
किसी पर भारी पड़ेगी मुहब्बत अदायगी की रस्में.


हमने हर कसम झूठी खाई थी
उनकी मुहब्बत पाने के लिए
आज वो हीं झूठी निकली…
मुझे महोब्बत में कसम खिलाने वाली


कसम खा तो लेता था बचपन मे झूटी
बड़े हुये तो पता चला इंसान का महत्व
उसके जाने के बाद पता चलता है


यूं कसम सुनकर कसम ना देना ,
शिकवा करना पर कसम ना देना ,
बहुत मुश्किल है कसम देकर चैन
से रहना , भूलकर भी कसम ना देना


हम तो तेरे दिल की महफ़िल सजाने आये थे,
तेरी कसम तुझे अपना बनाने आये थे,
किस बात की सजा दी तुमने हमको,
बेवफ़ा, हम तो तेरे दर्द को अपनाने आये थे


कसम खाया था ना दुबारा मिलेंगे
फिर उसी राह पे निकल पड़े हैं,
तेरी यादों को मिटा दिया,
फिर भी तेरी चौखट पर खड़े हैं


तू एक बार मेरी निगाहो मे देख कर कह दे,
कि हम तेरे काबिल नही,
कसम तेरी चलती साँसो की,
हम तुझे देखना तक छोड़ देंगे


मौसम को मौसम की बहारों ने लूटा,
हमे कश्ती ने नहीं किनारों ने लूटा,
आप तो डर गये मेरी एक ही कसम से,
आपकी कसम देकर हमें तो हज़ारों ने लूटा


गम नही ये कि कसम अपनी भुलाई तुमने,
गम तो ये है कि रकीबों से निभाई तुमने,
कोई रंजिश थी अगर तुमको तो मुझसे कहते,
बात आपस की थी, क्यूँ सब को बताई तुमने


Kasam Todne Wali Shayari In Hindi

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मुश्किल हो रहा है जीना मेरा
तुझे कसम है मेरी, दे दे वापस दिल मेरा


बदलना आता नहीं हमें मौसम की तरह,
हर इक रूप में तेरा इंतजार करते हैं,
ना तुम समझ सकोगे जिसे कयामत तक,
कसम तुम्हारी तुम्हें हम इतना प्यार करते हैं


तोड़ दो ना वो कसम जो खाई हैं,
कभी कभी याद करने में क्या बुराई हैं,
याद आप को किये बिना रहा भी नहीं जाता,
दिल में जगह आपने ऐसी जो बनाई हैं


मंजिल भी उसी की थी रास्ता भी उसका था,
एक हम अकेले थे काफ़िला भी उसका था,
साथ-साथ चलने की कसम भी उसी की थी,
और रास्ता बदलने का फ़ैसला भी उसका था


हर कदम हर पल साथ हैं,
दूर होकर भी हम आपके पास हैं,
आपका हो न हो पर हमें आपकी कसम,
आपकी कमी का हर पल अहसास हैं


आप ने कसम खाई थी दोस्ती निभाने की,
फिर क्यों करते हो बातें हमे सताने की,
हम इसलिए लड़ते है सबके सामने,
क्योंकि नजर लग जाती है रिश्तों को जमाने की


परछाई बनकर जिन्दगी भर,
तेरे साथ चलने का इरादा हैं,
तोड़कर दुनिया की सारी रस्में-कसमें,
तेरे साथ जीने का वादा हैं


पीते थे शराब हम;
उसने छुड़ाई अपनी कसम देकर;
महफ़िल में गए थे हम;
यारों ने पिलाई उसकी कसम देकर।


तेरे दिल को सजायेंगे अपने अरमान देकर,
तेरे लबो को हसाएंगे अपनी मुस्कान देकर !!
प्यार की कसम तुझे कबर से भी उठा लाएंगे,
तेरे जिस्म में हम अपनी सारी जान देकर


फिर ना पीने की कसम खा लूँगा;
साथ जीने की कसम खा लूँगा;
एक बार अपनी आँखों से पिला दे साकी;
शराफत से जीने की कसम खा लूँगा


हमारी मोहब्बत के ज़रा आदाब देखो
मेरी खुश्क आँखों में सैलाब देखो
फिर ना आने की कसम दी मुझे
बिखरे हैं मेरे सारे ख्वाब देखो


छिड़ी फिर दिन ढले दास्ताँ मोहब्बत की
याद आई अधुरी कहानी अपनी चाहत की
कसमें दे दे कर मनाता था जिसे
उस ने कदर ना जानी जज़बात की


Emotional Kasam Shayari

Emotional Kasam Shayari

मौसम को मौसम की बहारों ने लूटा,
हमे कश्ती ने नहीं किनारों ने लूटा


दिलों में भड़कती आतीश हो तुम
रेगीस्तानों में बरसती बारीश हो तुम
कसम तेरी बलखाती ज़ुल्फों की जानम
ज़िंदगी की आखरी ख्वाहीश हो तुम


तेरे बिन जीना एक सज़ा हैं
बहारों ने सिखी तुझ से अदा हैं
कसम से जो तु नहीं आता छत पर
आसमानों में चाँद लगता बहोत तन्हा हैं


जागती आँखों का ख्वाब हैं तू
गँगा किनारे खिलता गुलाब हैं तू
कसम देती हैं मुझे मोहब्बत की
मुझे फख्र हैं मेरा इंतिखाब हैं तू


चाहे अब दुनिया लाख कुछ कह दे,
किसी को कुछ ना बोलूंगा..
कसम है तेरे प्यार की मुझे,
तुम्हारी आवाज सुने बगैर अब आंख ना खोलूंगा


फूल ही फूल बरसें है प्यार के,
दामन में काँटे तो नहीं हमारे..
तुम्हारी कसम, हम किसी और के
नहीं हो सकते, सिवाय एक तुम्हारे

कोई कह दो उन्हें कि अपने
दांतो तले कलम ना दबाएं
उन नशीले अल्फाजों की क़सम,
पढ़ने वाला चूर चूर हो जाता है


ज़िंदगी तेरे नाम ये कर जाऊँगा
तेरे बिन जाने गज़ल बिखर जाऊँगा
कसमें दे कर ना आज़मा मुझे
तेरी खातीर हर राह से गुज़र जाऊँगा

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