India Shayari

20211008 083020 11zon

[141+] Gulzar Shayari In Hindi | गुलजार शायरी हिन्दी

Gulzar ShayariGulzar Sahab Whose Real Name is Sampooran Singh Kalra Is An Indian Lyricist; Poet; Shayar Who Was Born On 18 August 1934. He Is A Very Talented Writer In the Indian Music Industry. He has Given Many Hit Songs In Film Industry. He has also been Awarded Many Big Awards.

So Today We Have Brought the Best Collection Of Gulzar Shayari & गुलजार शायरी. This Collection Contains Various Types Of Shayari Like गुलज़ार शायरी इन हिंदी; Gulzar Shayari In Hindi 2 Lines; Gulzar Shayari Hindi; Shayari On Dosti By Gulzar; Dosti Shayari By Gulzar Etc. Also; Share These With Your Friends.

Gulzar Shayari

Gulzar Shayari

यूँ भी इक बार तो होता कि समुंदर बहता
कोई एहसास तो दरिया की अना का होता


होती ∆ नही ये मगर
हो जाये ऐसा अगर
तू ही ∆ नज़र आए तू
जब भी उठे ये नज़र


जब भी ∆आंखों में अश्क भर आए
लोग कुछ डूबते नजर आए
चांद जितने भी ∆गुम हुए शब के
सब के ∆इल्ज़ाम मेरे सर आए


सालों बाद मिले वो
गले ∆ लगाकर रोने लगे;
जाते वक्त ∆ जिसने कहा था
तुम्हारे जैसे हज़ार मिलेंगे


आऊं तो सुबह;
जाऊं तो मेरा नाम ∆ शबा लिखना;
बर्फ पड़े तो
बर्फ पे मेरा ∆ नाम दुआ लिखना


वो शख़्स जो कभी
मेरा था ही नही;
उसने मुझे किसी और का भी
नही होने दिया


मेरा ख्याल है अभी ∆ झुकी हुई निगाह में
खिली हुई हँसी भी है दबी हुई सी चाह में
मैं जानता हूं ∆ मेरा नाम गुनगुना रही है वो
यही ख्याल है मुझे; के साथ आ रही है वो


होती नही ये मगर
हो जाये ऐसा अगर
तू ही नज़र आए तू
जब भी उठे ये नज़र


वक्त ∆ कटता भी नही
वक्त रुकता भी नही
दिल है ∆ सजदे में मगर
इश्क झुकता भी नही


एक बार जब ∆ तुमको बरसते पानियों के पार देखा था
यूँ लगा था जैसे ∆गुनगुनाता एक आबशार देखा था
तब से मेरी नींद में बसती रहती हो
बोलती बहुत हो और ∆ हँसती रहती हो


जिन दिनों आप रहते थे;
आंख में धूप रहती थी
अब तो जाले ही जाले हैं
ये भी जाने ही वाले हैं


गुलजार शायरी

गुलजार शायरी

आँखों से आँसुओं के मरासिम पुराने हैं
मेहमाँ ये घर में आएँ तो चुभता नहीं धुआँ


झुकी हुई ∆ निगाह में कहीं मेरा ख्याल था
दबी दबी हँसी में इक; हसीन सा गुलाल था
मै सोचता था ∆ मेरा नाम गुनगुना रही है वो
न जाने क्यूं लगा मुझे के ∆ मुस्कुरा रही है वो


टकरा के सर को ∆ जान न दे दूं तो क्या करूं
कब तक फ़िराक ए यार के सदमे सहा करूं
मै तो हज़ार ∆ चाहूँ की बोलूँ न यार से
काबू में अपने दिल को न पाऊं तो क्या करूं


कोई आहट नही ∆ बदन की कहीं
फिर भी लगता है तू यहीं है कहीं
वक्त जाता ∆ सुनाई देता है
तेरा साया दिखाई देता है


गुल पोश कभी ∆ इतराये कहीं
महके तो नज़र आ जाये कहीं
तावीज़ ∆ बनाके पहनूं उसे
आयत की तरह मिल जाये कहीं


सुरमे से ∆लिखे तेरे वादे
आँखों की जबानी आते हैं
मेरे रुमालों पे लब तेरे
बाँध के निशानी जाते हैं


मेरे उजड़े ∆उजड़े से होठों में
बड़ी सहमी सहमी रहती है जबाँ
मेरे हाथों ∆ पैरों में खून नही
मेरे तन बदन में बहता है धुँआ


वो चेहरे जो ∆ रौशन हैं लौ की तरह
उन्हें ढूंढने की जरूरत नही
मेरी आँख में ∆ झाँक कर देख लो
तुम्हें आइने की जरूरत नही


उड़ते पैरों के तले जब बहती है जमीं
मुड़के हमने कोई मंज़िल देखी तो नही
रात दिन हम राहों पर शामो सहर करते हैं
राह पे रहते हैं यादों पे बसर करते हैं


दबी-दबी ∆साँसों में सुना था मैंने
बोले बिना मेरा नाम आया
पलकें ∆झुकी और ∆उठने लगीं तो
हौले से उसका सलाम आया


इस दिल में बस कर देखो तो
ये शहर बड़ा पुराना है
हर साँस में कहानी है
हर साँस में अफ़साना है


Gulzar Shayari In Hindi

Gulzar Shayari In Hindi

तुमको ग़म के ज़ज़्बातों से उभरेगा कौन;
ग़र हम भी मुक़र गए तो तुम्हें संभालेगा कौन


तेरे जाने से तो कुछ ∆ बदला नहीं;
रात भी आयी और चाँद भी था ∆मगर नींद नहीं


घर में अपनों से ∆ उतना ही रूठो
कि आपकी बात और ∆ दूसरों की इज्जत
दोनों बरक़रार रह सके


एक सपने के टूटकर ∆ चकनाचूर हो जाने के बाद
दूसरा सपना देखने के हौसले का नाम जिंदगी हैं


मैं दिया हूँ मेरी ∆दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं
हवा तो ∆बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं


मैं वो क्यों बनु जो तुम्हें चाहिए
तुम्हें वो कबूल क्यों नही जो मैं हूं


कोई न कोई रहबर रस्ता काट गया
जब भी अपनी रह चलने की कोशिश की


उठाए ∆फिरते थे एहसान जिस्म का जाँ पर
चले जहाँ से तो ये ∆पैरहन उतार चले


खुली किताब के सफ़्हे उलटते रहते हैं
हवा चले न चले दिन पलटते रहते है


काँच के पीछे ∆चाँद भी था और काँच के ∆ऊपर काई भी
तीनों थे हम वो भी थे और ∆मैं भी था तन्हाई भी


तुम्हारी ख़ुश्क सी आँखें भली नहीं लगतीं
वो सारी चीज़ें जो तुम को रुलाएँ; भेजी हैं


सहर न आई कई बार ∆नींद से जागे
थी रात रात की ये ज़िंदगी ∆गुज़ार चले


कोई अटका हुआ है पल शायद
वक़्त में पड़ गया है बल शायद


आ रही है जो चाप ∆क़दमों की
खिल रहे हैं कहीं ∆कँवल शायद


कितनी लम्बी ख़ामोशी से गुज़रा हूँ
उन से कितना कुछ कहने की कोशिश की


कुछ जख्मो की ∆उम्र नहीं होती हैं
ताउम्र साथ चलते हैं जिस्मो के ∆ख़ाक होने तक


बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला
जब से डिग्रियां समझ में आयी पांव जलने लगे हैं


बेहिसाब हसरते ना पालिये
जो मिला हैं उसे सम्भालिये


हाथ छुटे भी तो ∆रिश्ते नहीं छोड़ा करते;
वक्त की शाख से ∆लम्हें नहीं तोडा करते


तेरे जाने से कुछ बदला तो नहीं;
रात भी आई थी और चाँद भी; मगर नींद नहीं।


धागे बड़े कमजोर ∆चुन लेते हैं हम;
और फिर पूरी उम्र गांठ ∆बांधने में ही निकल जाती है।


कुछ रिश्तों में मुनाफा नहीं होता;
लेकिन ज़िन्दगी को अमीर बना देते हैं।


कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ;
किसी की आँख में हम को भी इंतज़ार दिखे।


नज़र झुका के ∆उठाई थी जैसे पहली बार;
फिर एक बार तो देखो मुझे उसी ∆नज़र से।


शोर की तो उम्र होती हैं
ख़ामोशी तो सदाबहार होती हैं


इश्क़ में जलते हुए ∆साँस तेजबी लगे
राज़ खुलता ही नहीं कोई तो चाबी लगे।


ये इश्क़ मोहब्बत की ∆रिवायत भी अजीब है
पाया नहीं है जिसको उसे खोना भी नहीं चाहते।


कोई पूछ रहा है मुझसे अब मेरी ज़िन्दगी की कीमत;
मुझे याद आ रहा है हल्का सा मुस्कुराना तुम्हारा।


महफ़िल में गले ∆मिलकर वह धीरे से कह गए;
यह दुनिया की रस्म है इसे ∆मुहोब्बत मत समझ लेना।


इतने लोगों में कह दो अपनी आँखों से
इतना ऊँचा न ऐसे बोला करे लोग मेरा नाम जान जाते हैं


2021 गुलजार शायरी

2021 गुलजार शायरी

दिन कुछ ऐसे गुज़ारता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई


दिन कुछ ऐसे ∆ गुज़ारता है कोई;
जैसे एहसान ∆ उतारता है कोई।

Din Kuchh Ese Guzarata Hain Koi;
Jaise Ehasaaan Utarata Hain Koi


रोई है किसी छत पे; अकेले ही में घुटकर;
उतरी जो लबों पर तो वो नमकीन थी बारिश।

Royi Hain Kisi Chhat Pe; Akeli Hi Me Ghutkat;
Utari Jo Labon Par To Wo Namkin Thi Barish


कभी तो चौक के देखे ∆ कोई हमारी तरफ़
किसी की आँखों में हमको भी को इंतजार दिखे।

Kabhi To Cauk Ke ∆Dekhe Koi Hamari Taraf;
Kisi Ki Ankhon Me Hamako Bhi Ko Intzaar Dikhe


वो चीज़ जिसे दिल ∆कहते हैं
हम भूल गए हैं रख के कहीं।

Wo Chiz Jise Dil ∆Kahate Hain;
Ham Bhul Gaye Hain Rakh Ke Kahi


शायर बनना बहुत ∆आसान हैं
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए।

Shayar Bananaa Bahuta ∆Aasaan Hain;
Bas Ek Adhuri Mohabbat Ki Mukammal Degree Chahiye


कुछ अलग करना हो तो भीड़ से हट के चलिए;
भीड़ साहस तो देती हैं मगर पहचान छिन लेती हैं।

Kuchh Alag Karana Ho To; Bheed Se Hat Ke Chaliye;
Bheed Sahas Deti Hain; Magar Pahachaan Chhin Leti Hain


मैंने दबी आवाज़ में पूछा ∆मुहब्बत करने लगी हो
नज़रें झुका कर वो बोली बहुत

Maine Dabi Aawaz Me Puchh ∆Mohabbat Karane Lagi Ho
Nazare Jhuka Kar Wo Boli! Bahut


मैं दिया हूँ मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं

Main Diya Hun! Meri Dushamani To Sirf Andhere Se HAIN
Hawa To Bewajah Hi Mere Khilaf Hain


सुना हैं काफी ∆पढ़ लिख गए हो तुम
कभी वो भी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते हैं।

Suna Hain Kafi ∆Padh Likh Gaye Hoo Tum
Kabhi Wo Bhi Padhon Jo Ham Kah Nahi Pate Hain.


कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती हैं;
और कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता।

Kabhi Zindagi Ek Pal Me Guzar Jati Hain;
Aur Kabhi Zindagi Ka Ek Pal Nahi Guzarata

Related Posts:-

Humsafar Shayari In Hindi
Khafa Shayari | Khafa Shayri In Hindi
Aansu Shayari | गम के आंसू शायरी

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *