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[ 115+ Top ] Book Shayari | Khuli Kitab Shayari | किताब शायरी

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Book Shayari

Book Shayari

जो पढ़ा है उसे जीना ही नहीं है मुमकिन
ज़िंदगी को मैं किताबों से अलग रखता हूँ


लम्हों की खुली किताब है जिन्दगी,
ख्यालों और साँसों का हिसाब है जिंदगी,
कुछ जरूरते पूरी, कुछ ख्वाहिशे अधूरी
इन्ही सवालों का जवाब है जिन्दगी.


गैरों के दस्तावेज पलटते-पलटते,
अपनी ही किताब अधूरी रह गयी,
किसी अनजान की बातों में वक्त जाया कर
खुद से करनी थी जो बातें अधूरी रह गयी


किताबों की तरह होती है हम सब की जिन्दगी,
ना तो लिखा है हमारा उस पर
लेकिन लिखी किसी और ने होती है.


किताबो से सारा ध्यान खत्म हो गया,
कि मोबाइल पर ही सारा ज्ञान उपलब्ध हो गया,
रातों को चलती रहती है मोबाइल पर उंगलिया
सीने पर किताब रख के सोये काफी वक्त हो गया


सामने जब उनके जाता हूँ,
किताब सा बन जाता हूँ,
बातें तो बहुत है कहने को
मगर खामोश रह जाता हूँ.


जिन्दगी की रीत के बारें में कोई जान न सका,
इसकी सच्चाई को कोई पहचान न सका
किताबों में कई किस्से दफन है लेकिन
पर हकीकत में हकीकत कोई जान न सका


आज वो कोने में पड़ी किताब फिर से उठा ली मैंने,
जिसमें कभी कुछ ख्वाब दबा के रखे थे,
जी लिया उन ख़्वाबों को फिर से ख्वाब में ही
वो ख्वाब भी तो बेचारे बेकार से पड़े थे.


वो खुली किताब थी,
मैंने उसे पूरे दिल से पढ़ा था,
पर जब वो बेवफा निकली
तो लगा दोस्तों ने सच कहा था.


खुद ही पलट लेता हूँ…
किताबे-जिन्दगी के पन्ने
वो लोग अब कहाँ…
जो मुझमें, मुझे तलाशते थे.


कलम है किताब है,
हाथ में एक कप कॉफ़ी है,
माना कि तू नहीं,
पर मेरी जान तेरी याद काफी है.


Khuli Kitab Shayari

Khuli Kitab Shayari

किताबें भी बिल्कुल मेरी तरह हैं
अल्फ़ाज़ से भरपूर मगर ख़ामोश


इश्क की एक दास्ताँ लिखी जायेगी,
कॉलेज में किसी ने फिर किताब माँगा है.


आज भी मैंने वो किताब छुपा रखी है,
जिसमें मैंने तेरी याद को सजा रखी है.


किताब सी शख्सियत दे ऐ मेरे खुदा,
सब कुछ कह दूँ, खामोश रहकर.


किताबों में लिखे हुए पैगाम रह जाते है,
सूखे हुए गुलाब में अहसास रह जाते है


किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को
काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के


बारूद के बदले हाथों में आ जाए किताब तो अच्छा हो
ऐ काश हमारी आँखों का इक्कीसवाँ ख़्वाब तो अच्छा हो


भुला दीं हम ने किताबें कि उस परीरू के
किताबी चेहरे के आगे किताब है क्या चीज़


वाक़िये तो अनगिनत हैं मेरी ज़िंदग़ी के
सोच रही हूं किताब लिखूं या हिसाब लिखूं


पढ़ने वालों की कमी हो गयी है आज इस ज़माने में
नहीं तो गिरता हुआ एक-एक आंसू पूरी किताब है


आज भी हमने तेरी यादों से पाना घर सजा रखा है,
तेरे दिए हुए उन फूलों को आज भी किताबों में छुपा रखा है.


Book Shayari In Hindi

Book Shayari In Hindi

काग़ज़ में दब के मर गए कीड़े किताब के
दीवाना बेपढ़े, लिखे मशहूर हो गया


किताबें करती हैं बातें बीते ज़माने की,
दुनिया की, इंसानों की आज की, कल की एक-एक पल की


मैं ने दो-चार किताबें तो पढ़ी हैं लेकिन
शेर के तौर-तरीक़े मुझे कम आते हैं


किताबें भी बिल्कुल मेरी तरह हैं
अल्फ़ाज़ से भरपूर मगर ख़ामोश


किताबें कैसी उठा लाए मय-कदे वाले
ग़ज़ल के जाम उठाओ बड़ा अँधेरा है


इश्क की एक दास्ताँ लिखी जायेगी,
कॉलेज में किसी ने फिर किताब माँगा है.


किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को
काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के


फ़लसफ़े सारे किताबों में उलझ कर रह गए
दर्सगाहों में निसाबों की थकन बाक़ी रही


धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो
ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो


छुपी हैं अनगिनत चिंगारियाँ लफ़्ज़ों के दामन में
ज़रा पढ़ना ग़ज़ल की ये किताब आहिस्ता आहिस्ता


खड़ा हूँ आज भी रोटी के चार हर्फ़ लिए
सवाल ये है किताबों ने क्या दिया मुझ को


Khuli Kitab Shayari In Hindi

Khuli Kitab Shayari In Hindi

वही फ़िराक़ की बातें वही हिकायत-ए-वस्ल
नई किताब का एक इक वरक़ पुराना था


जिंदगी की किताब के कुछ पन्ने होते हैं
कुछ अपने और कुछ बेगाने होते हैं
प्यार से सँवर जाती है जिंदगी
बस प्यार से रिश्ते निभाने होते हैं ।


रिश्ता उस किताब की तरह होता है,
जिसे लिखने में सालों लग जाते हैं
लेकिन इस किताब को जलने में
कुछ ही क्षण का वक्त लगता है।


पढ़ना ही है तो
इंसान को पढ़ने का हुनर सीखो
हर एक चेहरे पर लिखा है
किताबों से ज्यादा ।


ज़िंदगी तो सभी के लिए
एक रंगीन किताब है
फर्क बस इतना है कि
कोई हर पन्ने को दिल से पढ़ रहा है और
कोई दिल रखने के लिए पन्ने पलट रहा है।


लम्हों की खुली किताब है, जिंदगी
ख्यालों और सांसों का हिसाब है, जिंदगी
कुछ जरूरतें पूरी, कुछ ख्वाइशें अधूरी
इन्ही सवालों के जवाब है जिंदगी ।


जिंदगी को खुली किताब न बनाओ
क्योंकि लोगों को पढ़ने में नहीं
पन्ने फाड़ने मे मजा आता है ।


कर्म के पास न कागज है
और न किताब
लेकिन फिर भी रखता है
सारे जग का हिसाब ।


ज़िंदगी की किताब में धैर्य का
कवर होना बहुत जरूरी है, क्योंकि
वही हर पन्ने को बांधकर रखता है ।


ये किताबी नहीं,
जीवन का गणित है साहब ,
यहाँ दो में से एक गया तो कुछ नहीं बचता।
चाहे जीवन साथी हो या दोस्त ।


Latest 2021 Book Shayari

Latest 2021 Book Shayari

खुली किताब थी फूलों भरी ज़मीं मेरी
किताब मेरी थी रंग-ए-किताब उस का था


यूँ ही नहीं जिंदगी के किताब को सबके सामने खोलता हूँ,
हार हो या जीत हर खेल को बड़ी शिद्दत से खेलता हूँ।


इस मोहब्बत की किताब के दो ही सबक याद हुए,
कुछ तुम जैसे आबाद हुए, कुछ हम जैसे बर्बाद हुए


उसने पढ़ा मुझे महीनों तक,
फिर कहा, मैं पढ़ने लायक नहीं।


मोहब्बत ही तो है लोग भूल जाते हैं दिल लगा के बड़े आराम से,
अक्सर हमने देखा है सूखे गुलाब को गिरते हुए किताब से।


जहां में ढूंढ रहे हो तो इसे भूल कहो
फूल से लोग किताबों में मिला करते हैं।


वफ़ा नज़र नहीं आती कहीं ज़माने में,
वफ़ा का ज़िक्र किताबों में देख लेते हैं।


कुछ पन्ने क्या फटे ज़िन्दगी की किताब के,
ज़माने ने समझा हमारा दौर ही ख़त्म हो गया


मुझको पढ़ पाना हर किसी के लिए मुमकिन नहीं,
मै वो किताब हूँ जिसमे शब्दों की जगह जज्बात लिखे है।


रात भर चलती रहती हैं उंगलियाँ मोबाइल पर,
किताब सीने पे रख कर सोये हुए जमाना हो गया


किताब सी शख्सियत दे ऐ मेरे खुदा,
सब कुछ कह दूँ, खामोश रहकर।


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