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[70+Best] Collection Of Bachpan Shayari Hindi | बचपन शायरी

क्या आपको याद है जब हम बच्चे थे तो हम तेजी से बढ़ना चाहते थे। लेकिन अब हम उन दिनों को याद करते हैं और फिर से बच्चे बनना चाहते हैं और अपने दोस्तों के साथ आनंद लेना चाहते हैं ।आज हम लेकर आए हैं बचपन शायरी का बेहतरीन कलेक्शन। बचपन के इन बेहतरीन शायरी को पढ़कर याद आ जाएंगे आप अपने बचपन के लम्हे। ये आपके दिमाग को तरोताजा कर देंगे और आप अपने पुराने दोस्तों को याद करेंगे जिनसे आप अपने काम के कारण नहीं मिल पा रहे हैं। इस संग्रह को अपने पुराने दोस्तों के साथ भी साझा करें।

Do You Remember When We Were Children We Wanted To Grow Up Faster? But Now We Miss Those Days And Want To Become Child Again And Enjoy ourselves With Our Friends. Today We Have Brought Best Collection Of Bachpan Shayari. You, Will, Remember Your Childhood Moments While Reading These Awesome Shayari on Bachpan. These Will Refresh Your Mind And You Will Miss Your Old Friends Whom You Are Unable To Meet Due To Your Work. Share This Collection With Your Old Friends Also.

 

Bachpan Shayari In Hindi

Bachpan Shayari In Hindi

खुदा अबके जो मेरी कहानी लिखना
बचपन में ही मर जाऊ ऐसी जिंदगानी लिखना!


मोहल्ले में अब रहता है पानी भी हरदम उदास
सुना है पानी में नाव चलाने वाले बच्चे अब बड़े हो गए


याद आता है वो बीता बचपन जब खुशियाँ छोटी होती थी
बाग़ में तितली को पकड़ खुश होना तारे तोड़ने जितनी ख़ुशी देता था


किसने कहा नहीं आती वो बचपन वाली बारिश
तुम भूल गए हो शायद अब नाव बनानी कागज़ की


अजीब सौदागर है ये वक़्त भी
जवानी का लालच दे के बचपन ले गया


बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी
अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है


बचपन में कितने रईस थे हम ख्वाहिशें थी छोटी-छोटी
बस हंसना और हंसाना कितना बेपरवाह था वो बचपन


Shayari on Bachpan In Hindi

Shayari on Bachpan In Hindi

होठों पे मुस्कान थी कंधो पे बस्ता था..
सुकून के मामले में वो जमाना सस्ता था


चलो आज बचपन का कोई खेल खेलें,
बड़ी मुद्दत हुई बेवजह हंसकर नहीं देखा।


वो बचपन के भी क्या दिन थे मेरे न फ़िक्र कोई न दर्द कोई,
बस खेलो, खाओ, सो जाओ बस इसके सिवा कुछ याद नहीं।


वो बचपन की अमीरी न जाने कहां खो गई,
जब पानी में हमारे भी जहाज चलते थे।


कितने खुबसूरत हुआ करते थे
बचपन के वो दिन,
सिर्फ दो उंगलिया जुड़ने से
दोस्ती फिर से शुरु हो जाया करती थी।


बचपन में जब चाहा हँस लेते थे,
जहाँ चाहा रो लेते थे
अब मुस्कान को तमीज़ चाहिए,
अश्कों को तनहाई।


सुकून की बात मत कर

ऐ दोस्त बचपन वाला इतवार अब नहीं आता


Heart Touching Bachpan Shayari

Heart Touching Bachpan Shayari

बचपन की दोस्ती थी बचपन का प्यार था
तू भूल गया तो क्या तू मेरे बचपन का यार था


अब तक हमारी उम्र का बचपन नहीं गया

घर से चले थे जेब के पैसे गिरा दिए


हंसने की भी, वजह ढूँढनी पड़ती है अब;

शायद मेरा बचपन, खत्म होने को है!


लगता है माँ बाप ने बचपन में खिलौने नहीं दिए,

तभी तो पगली हमारे दिल से खेल गयी !!


चले आओ कभी टूटी हुई चूड़ी के टुकड़े से,

वो बचपन की तरह फिर से मोहब्बत नाप लेते हैं..


झूठ बोलते थे फिर भी कितने सच्चे थे

हम ये उन दिनों की बात है जब बच्चे थे हम


भूक चेहरों पे लिए चाँद से प्यारे बच्चे

बेचते फिरते हैं गलियों में ग़ुबारे बच्चे


Beautiful Shayari on Bachpan In Hindi

Beautiful Shayari on Bachpan In Hindi

फ़रिश्ते आ कर उन के जिस्म पर खुशबु लगाते है
वो बच्चे रेल के डिब्बों मे जो झुण्ड लगाते है!


तब तो यही हमे भाते थे,
आज भी याद हैं छुटपन की हर कविता,
अब हजारों गाने हैं पर याद नहीं,
इनमे शब्द हैं पर मीठा संगीत कहाँ.


याद आती है आज छुटपन की वो लोरियां,
माँ की बाहों का झूला ,
आज फिर से सूना दे माँ तेरी वो लोरी,
आज झुला दे अपनी बाहों में झूला.


बचपन में जहाँ चाहा हँस लेते थे
जहाँ चाहा रो लेते थे और अब
मुस्कान को तमीज चाहिए
और आंसुओं को तन्हाई!!


जिस के लिए बच्चा रोया था
और पोंछे थे आँसू बाबा ने
वो बच्चा अब भी ज़िंदा है
वो महँगा खिलौना टूट गया


बचपन के दिन भी कितने अच्छे होते थे
तब दिल नहीं सिर्फ खिलौने टूटा करते थे
अब तो एक आंसू भी बर्दाश्त नहीं होता
और बचपन में जी भरकर रोया करते थे


दौड़ने दो खुले मैदानों में,
इन नन्हें कदमों को जनाब
जिंदगी बहुत तेज भगाती है,
बचपन गुजर जाने के बाद
बचपन की वो यादें अब भी आती हैं
रोते में अब भी वो हँसा जाती हैं..!!


Emotional Bachpan Shayari

Emotional Bachpan Shayari

जिंदगी फिर कभी न मुस्कुराई बचपन की तरह
मैंने मिट्टी भी जमा की खिलौने भी लेकर देखे.


पुरानी अलमारी से देख मुझे खूब मुस्कुराता है,
ये बचपन वाला खिलौना मुझें बहुत सताता है।


बचपन की यादें मिटाकर बड़े रास्तों पे कदम बढ़ा लिया,
हालात ही कुछ ऐसे हुए की बच्चे से बड़ा बना दिया।


वो शरारत,वो मस्ती का दौर था,
वो बचपन का मज़ा ही कुछ और था।


हँसते खेलते गुज़र जाये वैसी शाम नही आती,
होंठो पे अब बचपन वाली मुस्कान नही आती।


शौक जिन्दगी के अब जरुरतो में ढल गये,
शायद बचपन से निकल हम बड़े हो गये।


कुछ ज़्यादा नहीं बदला‌ बचपन से‌ अब तक,
बस‌‌ अब वो बचपन‌ की‌ जिंद समझौते में बदल रहीं है।


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