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[130+] सूरज पर शायरी | Doobta Suraj Shayari In Hindi | सूरज शायरी

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सूरज पर शायरी

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हो के मायूस न यूँ शाम से ढ्लते रहिए
जिन्दगी भोर है सूरज से निकलते रहिए


मैं वो शजर भी कहाँ 🥺😭😶जो उलझ के सूरज से
मुसाफिरों के लिए साएबाँ बनाता है


आप को शब के अँधेरे से मोहब्बत ❤️🥰😘है, रहे
चुन लिया सुबह के सूरज का उजाला मैंने


न जाने कितने चरागों को मिल गई शोहरत
एक आफ़ताब के बे-वक़्त डूब जाने से..


हम वो राही हैं लिये फिरते हैं सर पर सूरज।
हम कभी पेड़ों से साया नहीं माँगा करते.


चढ़ने दो अभी और ज़रा वक़्त का सूरज।।
हो जाएँगे छोटे जो अभी साये बड़े हैं.💥🪔🌅


फनकार है तो हाथ पे सूरज सजा के ला
बुछता हुआ दिया न मुकाबिल हवा के ला।


किरन-किरन अलसाता सूरज पलक-पलक खुलती नींदें
धीमे-धीमे बिखर रहा है ज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन ।


तरस रहे हैं एक सहर को जाने कितनी सदियों से
वैसे तो हर रोज़ यहाँ सूरज का निकलना जारी है.💥🪔🌅


कोई सूरज से ये पूछे के क्या महसूस होता है
बुलंदी से नशेबों में उतरने से ज़रा पहले


मैं वो शजर भी कहाँ जो उलझ के सूरज से
मुसाफिरों के लिए साएबाँ बनाता है


Doobta Suraj Shayari

Doobta Suraj Shayari

आप की नजरों में सूरज की है जितनी अजमत’
हम तो चिरागों का भी उतना ही अदब करते हैं


सदियों से पी रहा हैं 🥺😭😶शबनम कये लहू
शबनम को एक बार तो सूरज पिलाइए


सर से तेज धूप न जाने टलेगी कब
सूरज जो गर्दिशों का है वो डूबता नहीं


बौने खुद अपने सायों से खुश हमसे हैं खफ़ा
अन्धेर किस कदर है ये सूरज के शहर में खफ़ा


मत घबरा ऐ प्यासे दरिया सुरज आने वाला है
बर्फ़ पहाड़ों से पिघलेगी जल ही जल हो जाएगा


उनकी किस्मत का ❤️🥰😘सूरज भी डूबा रहा
देर तक सवेरे जो सोते रहे


तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चिराग
क्या लोग क्या हैं, सूरज को दिखाते हैं चिराग


इन अँधेरों से ही सूरज कभी निकलेगा “नज़ीर”
रात के साए ज़रा और निखर जाने दे


तू मुकद्दस आँख है यानी हसी सुरज की आँख
और मैं गहरी गुफ़ा वो भी किसी पाताल की


सूरज न बन सके किसी घर का फ़िया तो हो
इन्साँ की जिन्दगी का कोई मुद्दआ तो हो


दिन में सूरज सताए.💥🪔🌅 छाँव बनकर आइए
रात काली हो तो रास्ते का दिया बन जाइए


Latest सूरज पर शायरी

Latest सूरज पर शायरी

सर से तेज धूप न जाने टलेगी कब
सूरज जो गर्दिशों का है वो डूबता नहीं


चढ़ने दो अभी और.💥🪔🌅 जरा वक़्त का सूरज,
हो जायेंगे वो भी छोटे जो अभी साए बड़े हैं!!


बाम-इ-मिन्हा से महताब उतरे,
दस्त-ए-साक़ी में आफ़ताब आये।
काश होता मेरे हाथों में सूरज का निजाम


मैं ज़ख़्म-ए-आरज़ू हूँ,❤️🥰😘 सरापा हूँ आफ़ताब
मेरी अदा-अदा में शुआयें हज़ार हैं


चाँद सूरज मिरी चौखट पे कई सदियों से
रोज़ लिक्खे हुए चेहरे पे सवाल आते हैं


तारीकियों में और चमकती है दिल की धूप,
सूरज तमाम रात यहां .💥🪔🌅डूबता नहीं!!


2021 Doobta Suraj Shayari

2021 Doobta Suraj Shayari

बौने खुद अपने सायों से खुश हमसे हैं खफ़ा
अन्धेर किस कदर है ये सूरज के शहर में खफ़ा


काले घर में सूरज रख के.💥🪔🌅
तुमने शायद सोचा था,
मेरे सब मोहरे पिट जायेंगे ❤️🥰😘
मैंने एक चिराग़ जला कर,
अपना रस्ता खोल लिया!


कलम, दरांती, बुरुश, हथोड़ा
किरन-किरन अलसाता सूरज
पलक-पलक खुलती नींदें .💥
धीमे-धीमे बिखर रहा है
ज़र्रा-ज़र्रा जाने कौन ।


नज़दीकियों में दूरका मंज़र तलाश कर
जो हाथमें नहीं है वो पत्थर तलाश कर
सूरज के इर्द-गिर्द भटकने से फ़ाएदा
दरिया हुआ है गुम तो समुंदर तलाश कर


कल भी सूरज निकलेगा
कल भी पंछी गायेंगे
सब तुझको दिखाई देंगे
पर हम ना नज़र आएंगे


आपके जलवों में घिर गया आखिर,
जर्रे को आफताब होना ही था!!
कुछ आपकी निगाह का फ़िर थी,
कुछ मुझे भी खराब होना ही था!!


इंतजार की आरजू अब खो गयी है,
खामोशियों की आदत हो गयी है,
ना शिकवा रहा ना शिकायत किसी से,
अगर है तो एक मोहब्बत,
जो इन तन्हाइयों से हो गयी है


प्यार किया तो बदनाम हो गए,
चर्चे हमारे सर ए आम हो गए,
ज़ालिम ने दिल भी उसी वक़्त तोडा,
जब हम उसके प्यार के गुलाम हो गए


अगर तुम किसी चीज को पसंद नहीं करते हो
तो उसे बदल दो
अगर उसे बदल नहीं सकते
तो अपना रवैया ही बदल दो


हम वो राही हैं सर पर लिये फिरते हैं सूरज।।
हम कभी पेड़ों से साया नहीं माँगा करते!!
यदि आप को शब के अँधेरे से मोहब्बत है रहे।।
चुन लिया सुबह के सूरज का उजाला मैंने!!


कुछ ख़्वाबों के ख़त इनमें
कुछ चाँद के आईने सूरज की शुआएँ हैं
नज़मों के लिफाफ़ों में कुछ मेरे तजुर्बे हैं
कुछ मेरी दुआएँ हैं


Doobta Suraj Shayari In Hindi

Doobta Suraj Shayari In Hindi

उनकी किस्मत का सूरज भी डूबा रहा
देर तक सवेरे जो सोते रहे


थक गया सूरज अब घर को जायेगा
तू भी आजा मेरे पिया कल ये सूरज फिर जल्दी जगायेगा


खून में तेरे मिट्टी, मिट्टी में तेरा खून..
ऊपर सूरज, नीचे डामर, बीच में मई और जून


मैं करूं भी तो किस बात का घमंड?
सूरज की रोशनी को भी मैंने रात के साये में ढलते देखा है।।


ठहर कर कभी, सूरज देखता ही नहीं
तभी रोज शाम संवरती है, उसके लिए


सोलहवें ज़ीने पे सूरज था ‘उबैद’
जनवरी की इक सलोनी शाम थी


मिरे सूरज आ! मिरे जिस्म पे अपना साया कर
बड़ी तेज़ हवा है सर्दी आज ग़ज़ब की है


शाम को आओगे तुम अच्छा अभी होती है शाम
गेसुओं को खोल दो सूरज छुपाने के लिए


यूँ जागने लगे तिरी यादों के सिलसिले
सूरज गली गली से निकलता दिखाई दे


तीरगी में नूर आएगा नज़र
डूबते सूरज को भी सज्दा करो


शाम हुई तो सूरज सोचे
सारा दिन बेकार जले थे


सूरज शायरी

सूरज शायरी

हर एक घर में आने दे सूरज की रौशनी
सूरज के आगे बैठ न दीवार खींच कर


गिरती हुइ दीवार का हमदर्द हूँ लेकिन
चढ़ते हुए सूरज की परस्तिश नहीं करता


चाँद सूरज मिरी चौखट पे कई सदियों से
रोज़ लिक्खे हुए चेहरे पे सवाल आते हैं


अब आ भी जा कि सुबह से पहले ही बुझ न जाऊं
ऐ मेरे आफताब बहोत तेज है हवा


तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चिराग़
लोग क्या सादा हैं सूरज को दिखाते हैं चिराग़


मैं भटकती हूँ क्यूँ अंधेरे में
वो अगर आफताब जैसा है


तू है सूरज तुझे मालूम कहां रात का दुख
तू किसी रोज उतर घर में मेरे शाम के बाद


तेरे जलवों में घिर गया आखिर,ज़र्रे को आफताब होना था
कुछ तुम्हारी निगाह काफ़िर थी,कुछ मुझे भी खराब होना था


हर ज़र्रा आफ़ताब है, हर शय है बा-कमाल
निस्बत नही कमाल को शरहे कमाल से


मैं सूरज हूँ कोई मंज़र निराला छोड़ जाऊँगा,
उफ़क़ पर जाते जाते भी उजाला छोड़ जाऊंगा


घबराएँ हवादिस से क्या हम जीने के सहारे निकलेंगे
डूबेगा अगर ये सूरज भी तो चाँद सितारे निकलेंगे !!


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